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गंगा और शव

कौन कहता है कि गंगा में लाशें बह रही हैं
अब तो लाशों में गंगा बह रही है।

कौन कहता है कि प्रशासन
साम्प्रदायिक भेदभाव करता है
प्रशासन तो सब लाशों से
एक जैसा बर्ताव करता है।

कौन कहता है
नदी किनारे मानव सभ्यता पनपती है
अब तो नदी तट पर
मानवता की रूह दहलती है।

साहेब!
एक बात बताओगे
अगर हर घाट पर मुर्दे दफ़्न होंगे
तो अगली दिवाली पर
दीये कहाँ जलाओगे?
✍️ चिराग़ जैन

सत्यमेव जयते

सत्य के आधार पर खड़े
चार-चार शेर भी
झूठ बोलनेवालों को
कुछ नहीं कहते।

देश की हर सरकारी मुहर पर
एक झूठ लिखा है –
‘सत्यमेव जयते’।
✍️ चिराग़ जैन

मदद की होड़

रेगिस्तान की दोपहर में
पानी को तरस रहा एक प्यासा
तपती हुई रेत में पड़ा था;
ऊपर से सूरज का भी रुख कड़ा था।
उसको पानी देने के लिए
केंद्र सरकार ने बिल पास किया;
राज्य सरकार ने भी
उसका स्वतः संज्ञान लिया।

लेकिन ज्यों ही
राज्य सरकार का कारिंदा
मदद लेकर प्यासे की ओर बढ़ा,
उसके सद्भाव को लगा
एक जोरदार झटका;
क्योंकि पीछे केंद्र सरकार
लेकर आ रही थी
पानी से भरा मटका।

उधर केंद्र सरकार की नज़र भी
राज्य सरकार की मदद योजना पर पड़ी
तो उसके मटके की
आँखें हो गयी बड़ी।

अब प्यासा हो गया था गौण
दोनों एक-दूसरे से पूछने लगे-
“तू कौन? तू कौन?”

दोनों ही मदद करने के
मूल लक्ष्य से भटक गए
और एक-दूसरे से ऐसे भिड़े
कि दोनों के मटके चटक गये।

फिर राज्य सरकार ने भरी हुंकार
और प्यासे की विरुद्ध दर्ज की
नामज़द एफआईआर।
“कि राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए
प्यासा व्यक्ति
नाटक कर रहा है
और जनता में
राज्य की व्यवस्था के विरुद्ध
घृणा भर रहा है।”

केंद्र सरकार ने
इस एफआईआर की
पूरी ही पैमाइश कर दी
और प्यासे की प्यास की
सीबीआई जाँच की फरमाइश कर दी।

घंटों तक चलता रहा यह ड्रामा
मीडिया से लेकर
अदालतों तक पसर गया हंगामा
आस के मटके फूट चुके थे
समाधान का पानी बिखर चुका था
और प्यासा, दो घूँट पानी के इंतज़ार में
रहनुमाओं की ओर देखते-देखते
कबका मर चुका था!

✍️ चिराग़ जैन

नया धर्म : सेंड टू ऑल

आज मुझे एहसास हुआ कि हमारे देश में कोई आम आदमी है ही नहीं। हर नागरिक के दुनिया के बड़े से बड़े आदमी से डायरेक्ट कॉन्टेक्ट हैं। और सबको ही कोई कल्पवृक्ष टाइप की सिद्धि प्राप्त है। यही कारण है कि जब उन्हें पैनडेमिक से संबंधित कोई पुख्ता जानकारी चाहिए होती है तो उनके व्हाट्सएप पर सीधे डब्ल्यूएचओ से मेसेज प्रकट हो जाता है। वे उस मेसेज को पढ़ते हैं और तुरंत अपने मोबाइल से जुड़े एक-एक जनसामान्य को फॉरवर्ड करके उन्हें अज्ञान के अंधेरे से बाहर निकाल लेते हैं।
कुछ तो इतने परोपकारी होते हैं कि स्वयं पूरा मेसेज पढ़ने में समय नष्ट करने की बजाय, सीधे औरों तक भेजकर परोपकार में जुट जाते हैं।
कई बार ऐसा लगता है कि अमरीका, जर्मनी, कनाडा, चीन और ब्रिटेन जैसे देशों के साथ-साथ यूएनओ और नासा जैसी संस्थाएं रोज़ सुबह अपनी दुकान का शटर उठाते ही भगवान के आगे अगरबत्ती जलाने से पहले यह चैक करती होंगी कि आज उनके आका को कौन-सी इन्फॉर्मेशन चाहिए। और फिर जो बिडेन से लेकर बोज़कर तक अपनी लुंगी फोल्ड करके इन्फॉर्मेशन के पुलाव बनाने पर जुट जाते हैं और एक-एक कर सारी इन्फॉर्मेशन इस देश के व्हाट्सएप यूज़र्स के पास पहुँचा देते हैं।
‘भारत सरकार में अंदरख़ाने क्या चल रहा है’ से लेकर ‘शनि के पास से गुज़रते हुए जुपिटर क्या कहेगा’; तक की हर छोटी-बड़ी सूचना इनके पास उपलब्ध होती है। चीन और पाकिस्तान जैसे देशों में भारत को लेकर क्या रणनीति बनाई जा रही है, पाकिस्तान और चीन गली के नुक्कड़ पर खड़े होकर भारत के खि़लाफ़ क्या खुसर-फुसर कर रहे हैं; यह चौबीस घण्टे इनके ट्रांसमीटर पर रेकॉर्ड होता रहता है। कई बार तो शक होता है कि पाकिस्तान और चीन नेकर पहनकर दो उंगली आगे करके पहले इनसे परमिशन मांगने तो नहीं आते कि- ‘मैडम जी, क्या हम भारत के खि़लाफ़ कानाफूसी कर सकते हैं?’
पूरी दुनिया के देशों की विदेश नीति इनके लिए बच्चों के घर-घर खेलने से ज़्यादा कुछ नहीं है। अमरीका ने पाकिस्तान को कह दिया है कि तू चीन से कुट्टा हो जा तो मैं तुझे इंग्लैंड से अब्बा करवा दूंगा। समझ ही नहीं आता कि ये देश हैं या नोबिता और शिनचैन!
भारत सरकार का सूचना प्रसारण मंत्रालय, बीबीसी, एएनआई और इतने सारे मीडिया संस्थानों की टुच्ची इन्फॉर्मेशन इन लोगों की पर्सनेलिटी को सूट नहीं करती। आत्मनिर्भरता इनके ख़ून में शामिल है इसलिए अमरीका, जापान, चीन, नासा जैसे इनके योग्य मजदूर इन्हें कोई सूचना उपलब्ध नहीं करा पाते तो ये पुरातन भारतीय पद्धति का प्रयोग करते हुए गहरे ध्यान में उतरकर स्वयं सूचनाएं निर्मित कर लेते हैं। इस प्रक्रिया में प्राप्त हुई सूचनाओं में पूरा ब्रह्मांड और स्वयं ईश्वर भी इनकी दृष्टि से अछूता नहीं रहता।
माता वैष्णोदेवी के दरबार से चला मेसेज फॉरवर्ड करने पर कितने लोगों की लॉटरी खुल गयी इसका पूरा हिसाब इनके लेजर में उपलब्ध होता है। यह और बात है कि भारत में लॉटरी बैन है।
ऐसे ही गहरे ध्यान में उतरकर प्राप्त हुई सूचना के दम पर उत्तर प्रदेश में एक बाबा ने भारत सरकार के पुरातत्व विभाग समेत पूरे देश को सोने का भण्डार खोजने के काम में लगा दिया था। और अंत में सोना न मिलने पर वे बाबा, पुरातत्व विभाग और हम सब बेशर्मी के साथ अन्य फर्स्ट हैंड इंफोर्मेशन्स फारवर्ड करने में जुट गए, क्योंकि ज़मीर, आत्मा और शर्म जैसे शब्द इन सूचनाओं के वेग में कहीं ग़ुम हो चुके हैं।

✍️ चिराग़ जैन

मददगारों के नाम पाती

सद्भावना युक्त मित्रो!
कोरोना की इस महामारी में आपके प्रयास स्तुत्य हैं। आपकी नीयत पर भी कोई संदेह नहीं है, लेकिन किसी को भी मदद भेजने से पहले कृपया निम्न बातों का ध्यान रखें-
1) संकट में फँसे व्यक्ति को केवल वही जानकारी भेजें, जिसकी आपकी टीम ने पिछले 24 घण्टे के भीतर स्वयं पड़ताल की है।
2) सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी फॉरवर्ड सन्देश को अग्रेषित करने से बचें, क्योंकि इन्हीं संदेशों की वायरल क्षमता का लाभ उठाकर ठग और मुनाफाखोर अपना काम कर रहे हैं।
3) यदि हर व्यक्ति स्वयं वेरिफाई करेगा तो वह नम्बर रेस्पॉन्स करना बंद कर देगा इसलिए इसके लिए अपनी टीम में एक व्यक्ति नियुक्त करें।
4) मरीज़ के साथ जीवन के लिए जूझ रहे लोग घबराए हुए हो सकते हैं, ऐसे में अपने विवेक को बचाए रखना आपकी ज़िम्मेदारी है। उनके रुदन से द्रवित होकर उतावलेपन में उन्हें अपुष्ट जानकारी भेजने की ग़लती न करें। उन्हें कहें कि आप अपने प्रयास जारी रखें, कोई कन्फर्म लीड मिलते ही आप उन्हें कॉल करेंगे।
5) अगर किसी अस्पताल की वैकेंसी के बारे में आपको जानकारी नहीं है तो भी किसी को उस अस्पताल का विकल्प बताते समय यह अवश्य बताएँ कि वहाँ क्या-क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
6) चिकित्सा करना आपके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, इसलिए किसी के लाख बार कहने पर भी किसी को कोई चिकित्सकीय सलाह न दें। बल्कि उसके लिए फोन पर कोई डॉक्टर उपलब्ध कराने का प्रयास करें।
7) सोशल मीडिया पर कोई लीड पोस्ट न करें। जिसे आवश्यकता हो उसे वेरिफाइड लीड इनबॉक्स में ही दें।
8) अपेक्षित सहायता पहुँचने के बाद अपने सोशल मीडिया हैंडल से उसकी अपील डिलीट करना न भूलें। यह बेहद आवश्यक है।
9) यदि आप किसी को कोई मदद करने की स्थिति में नहीं हैं तो उसको मना करना सीखें।
10) जो व्यक्ति आपको अपुष्ट फारवर्ड भेज रहा है उसे ऐसा करने के लिए मना करें।

बिना देखे, सौ मील का सफ़र तय करने से बेहतर है कि देखकर दस क़दम चला जाए।
✍️ चिराग़ जैन

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