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छल

आपके पक्ष में खड़ा कोई सिपाही जब शत्रु के साथ छल करता है, तब वह आपके साथ छल करने का अभ्यास कर रहा होता है।

✍️ चिराग़ जैन

सभ्यता की सीमा

अराजकता किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। स्थिति चाहे कोई भी हो, यदि सभ्यता की सीमा रेखा लांघकर उसका उपाय खोजा जाएगा तो यह पूरी सामाजिक व्यवस्था पर वज्रपात होगा। कोई राजनीतिज्ञ कितना भी भ्रष्ट क्यों न हो; यदि उस पर जूता या स्याही फेंकी जाए, यदि उसे थप्पड़ मारा जाए, तो यह अपने समाज को वीभत्स बना डालने की पहल होगी।
कोई प्रत्याशी वोट मांगने जाए तो उसे वोट देना या न देना जनता का अधिकार है किन्तु उसे लतियाने या मारने-पीटने से जनता की शक्ति नहीं, असभ्यता उजागर होती है।
हिंसा या बर्बरता किसी के भी साथ स्वीकार्य नहीं हो सकती। किसी अपराध के घोषित अपराधी तक को दण्डित करने का अधिकार विधि द्वारा नियुक्त तंत्र को ही दिया जाता है। उसे जनता के बीच फेंक कर उसकी जनहत्या करने की वक़ालत जंगलराज में सम्भव है, सभ्य समाज में नहीं।
जंगलों को तराश कर नगरों का निर्माण करने वाले हमारे पुरखे उस समय अपमानित होते हैं जब हम तंत्र की अनदेखी करके किसी की हत्या या प्रताड़ना का समर्थन करते हैं।
न्याय व्यवस्था लचर है तो उसका उपचार किया जाए; कार्यपालिका में भ्रष्टाचार है तो उसकी सफाई के प्रयास किए जाएं; विधायिका में विद्रूपता है तो मताधिकार से उसे सत्ता से बाहर किया जाए; किंतु अराजक होकर इनमें से किसी भी विकृति का निदान असंभव है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन, सविनय अवज्ञा, धरना, असहयोग, आंदोलन, रैली और हड़ताल तक से तंत्र की शल्य चिकित्सा स्वीकार्य है किन्तु स्वयं नियमों की अवहेलना करके, स्वयं बर्बर होकर तंत्र को आँखें दिखाना समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
कांग्रेस को अभिमान है कि उसने बांध, व्यवसाय और तकनीकें निर्मित कीं। भाजपा को अभिमान है कि उसने मंदिर निर्माण किया, किसी को अभिमान है कि उसने एक जाति विशेष में अपना काडर निर्मित कर लिया, किसी को विश्वास है कि उसने एक वर्ग विशेष को अपना वोटर बनाया किन्तु कोई आज तक यह दावा नहीं कर सका कि उसने इस देश में ‘नागरिकों’ का निर्माण किया।
यह देश की पहली आवश्यकता है। और इसकी ओर किसी का ध्यान नहीं है। यदि सब विचाराधाराओं ने नागरिक निर्माण के इस कार्य को अनदेखा करके इसी प्रकार अपने-अपने वोटर, अपने अपने काडर, अपने अपने गुंडे, अपने अपने भक्त और अपने अपने चमचे बनाने पर ही ज़ोर दिया तो फिर न तो किसी के सीढ़ियों पर लड़खड़ाने पर सम्वेदनशीलता देखने को मिलेगी और न ही किसी के स्कूटी से गिरकर अस्थिभंग होने पर कोई शालीनता दिखाई देगी।
हम सब एक दूसरे के कष्ट पर ठहाका लगा रहे होंगे और पूरा विश्व हमारे इस तीतरबाज़ समाज की खिल्ली उड़ा रहा होगा।

✍️ चिराग़ जैन

भाजपा की चुनावी रणनीति

जब खेलन देनउ नाय
तो हाय
जे खेल को ड्रामा काइं करनौ

बैटिंग करनेवालन के बल्ले ही तोड़ दए हैं
रन लेनेवालन के दोनूं जूते जोड़ दए हैं
सीमा कू चर गई गाय
आय हाय
जे खेल को ड्रामा काइं करनौ

कैसे फेंकें गेंद समूची पिच ही खोद रखी है
अपनी तीनों किल्ली तुमने भगवा पोत रखी हैं
भगवा कू कौन गिराय
मर जाय
जे खेल को ड्रामा काइं करनौ

जिधर जरा हरक़त हो गेंद उधर ही मुड़ सकती है
एम्पायर की अपनी ख़ुद की किल्ली उड़ सकती है
कोई कैसे हाथ हिलाय
रे हाय
जे खेल को ड्रामा काइं करनौ

✍️ चिराग़ जैन

मनमोहन सिंह के बयान पर सियासत

जिनको मौनी बाबा कह के चिढ़ाया
उन्हीं का बयान ले उड़े
पहले तुमको निहत्था बताया
फिर हाथ से कमान ले उड़े

कहने भर को पीएम थे पर बोल न पाए मनमोहन
हाथ हिलाना दूर, होंठ तक खोल न पाए मनमोहन
अपने ही घर में प्रतिभा का मोल न पाए मनमोहन
अपना ऑर्डिनेंस फटने पर डोल न पाए मनमोहन
उनके होंठों पे ताला लगाया
ये पूरा हिन्दुस्तान ले उड़े
जिनको मौनी बाबा कह के चिढ़ाया
उन्हीं का बयान ले उड़े

आंदोलन पर लाठी बरसी, कंघी बेची गंजे को
सीबीआई तोता बन गई ऐसा कसा शिकंजे को
अपनी ही बंदूक की गोली धांय लगी है पंजे को
जाने किस-किस बेचारे की हाय लगी है पंजे को
तुमने सोतों पे डंडा चलाया
ये सपनों की दुकान ले उड़े
जिनको मौनी बाबा कह के चिढ़ाया
उन्हीं का बयान ले उड़े

ऊंचाई का अहम न करते तो झुक जाना ना पड़ता
ठोकर पर संभले होते, घुटनों पर आना ना पड़ता
अपनों से मिलते-जुलते तो मान गंवाना ना पड़ता
दूर-दूर तक जनता के दर चलकर जाना ना पड़ता
अपने हाथों ही अवसर गंवाया
ये सत्ता का गुमान ले उड़े
जिनको मौनी बाबा कह के चिढ़ाया
उन्हीं का बयान ले उड़े

✍️ चिराग़ जैन

भाजपा और चुनाव

केलकूलेटर ने भी पकड़े हैं कान
ये जादू मन्तर कैसे सीखा
कहीं मिलते नहीं हाथों के निशान
ये जादू मन्तर कैसे सीखा

नगालैंड में ख़ुद प्रत्याशी वोट न करने आता
त्रिपुरा में वोटिंग पर्सेंटेज सौ से ऊपर जाता
सौ पर्सेंट से भी ज़्यादा मतदान
ये जादू मन्तर कैसे सीखा

प्रत्याशी के प्रस्तावक ही अंडर ग्राउण्ड हुए हैं
बाकी सभी लड़ाकों के भी पर्चे राउण्ड हुए हैं
सबकी सूरत पर है एक ही निशान
ये जादू मन्तर कैसे सीखा

बीजेपी की रैली, बाकी सबकी रेल बना दो
ऐसा करो चुनावों पर ही बुलडोजर चलवा दो
ना समस्या बचे ना ही समाधान
ये जादू मन्तर कैसे सीखा
✍️ चिराग़ जैन

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