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सच बोलना पाप है

क्या कहा, तुम सच कहोगे और ज़िंदा भी रहोगे झूठ का चाबुक तुम्हारी खाल खींचेगा समझ लो और फिर सारा ज़माना आँख मीचेगा समझ लो ख़ुद नदी ने इस तरह के दाँव सारे रख दिए हैं नाव जैसे दिख रहे पत्थर किनारे रख दिए हैं पेड़, जिसकी छाँह के दम पर भिड़े हो धूप से तुम धूप ने उस पेड़ की...

अनाड़ी का आनंद

जिसे नाचना आता है वह अच्छा डांस करता है, लेकिन जिसे नाचना नहीं आता वह मज़ेदार डांस करता है। ✍️ चिराग़...

अज्ञातवास

राज्य, वैभव और निज पहचान तक से हाथ धोकर चल दिये पाण्डव स्वयं के शौर्य से अज्ञात होकर वीरता के उपकरण को गौण रहना है शक्ति को अब होंठ सीकर मौन रहना है भाग्य ने क्या खेल खेला है विवशता के पलों में सूख जाने की अनोखी खलबली है बादलों में शस्त्र, जिनको प्राप्त करने के लिए...

चिराग़ों के घर नहीं होते

सदा तो सँग तलक दर-ब-दर नहीं होते कहा ये किसने चिराग़ों के घर नहीं होते अभी असर न दिखा हो तो इंतज़ार करो हैं ऐसे दांव भी जो बेअसर नहीं होते ग़मों की धूप में नाज़ुक बदन मुफ़ीद नहीं गुलों के जिस्म नरम, सूखकर नहीं होते खुद अपना बोझ उठाने में कोई हर्ज़ नहीं पराये पाँव बहुत...
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