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कुएं में भांग

मन यह सोचकर आतंकित है कि हम उस स्थिति तक आ चुके हैं जहाँ कुँआ और खाई में से किसी एक को चुनने की विवशता है। एक ओर वे हैं, जिनसे छीनकर सत्ता भाजपा को दी गई थी और दूसरी ओर ये हैं जो ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी कीमत पर इन्हें सत्ता से बाहर न किया जा सके। हमें...

नफ़रत की फसल

घृणा और द्वेष के बीज अब फलने लगे हैं। विषबेल ने एक बड़े से वृक्ष को जकड़कर उसके प्राण सोखने प्रारंभ कर दिए हैं। रंग-बिरंगे फूलों से सजे उद्यान का हर फूल दूसरे रंग के फूलों से नफ़रत करने लगा है। किसी डाल को कटते देखकर अन्य डालियाँ ख़ुश होने लगी हैं। क्यारियों ने अपनी...

कुर्सी की खुमारी

सबने भर भर के अपनी पिचकारी, विरोधियों पे मारी होली का चढ़ा रंग भाइयो! कहीं लाठी बजी है कहीं गारी, कहीं कुर्सी की खुमारी सभी का न्यारा ढंग भाइयो! बच्चन जी ने खूब कहा था मेल कराती मधुशाला पर सत्ता का कैसा-कैसा खेल कराती मधुशाला शिक्षामंत्री जैसों को भी फेल कराती मधुशाला...

प्रैक्टिकल करने के समय

हमने लड़ाकों के इतने गुण गाए हैं, कि हम सौहार्द और शांति को ‘हीन’ मान बैठे हैं। हम अहिंसा का संदेश देनेवाले महावीर की संज्ञा को समझने में चूक गए हैं। अध्यात्म की पाठशाला में हमने ‘धैर्य’; ‘क्षमा’; ‘दया’;...

गिरगिट का कष्ट

नेता से अपनी तुलना का रिवाज गिरगिट को बहुत खलता है गिरगिट केवल संकट देखकर रंग बदलता है नेता तो अवसर देखकर रंग बदलता है। ✍️ चिराग़...
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