Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
प्यार वाला एक अहसास जब से जगा है
अँखियों से भेद खोलती है मेरी ज़िन्दगी
हर घड़ी हर पल दिन-रैन बिन चैन
उस ही का नाम बोलती है मेरी ज़िन्दगी
अपना तो दिल भूल आई किसी आँचल में
अब बावरी-सी डोलती है मेरी ज़िन्दगी
मथुरा में बन बनवारी बैठ गई और
बृज की हवा टटोलती है मेरी ज़िन्दगी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
हर कोई ख़ुद को यहाँ कुछ ख़ास बतलाता मिला
हर किसी में ढूंढने पर आदमी यकसा मिला
आज के इस दौर में आदाब की क़ीमत कहाँ
वो क़लंदर हो गया जो सबको ठुकराता मिला
हर दफ़ा इक बेक़रारी उनसे मिलने की रही
हर दफ़ा ऐसा लगा, इस बार भी बेज़ा मिला
जिसने उम्मीदें रखीं और क़ोशिशें हरगिज़ न कीं
उसको अन्ज़ामे-सफ़र रुसवाई का तोहफ़ा मिला
रात जब सोया तो हमबिस्तर रहा उनका ख़याल
सुब्ह जब जागा तो होठों पर कोई बोसा मिला
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta
प्यार की बयार में ये दिल झूम नाचता है
जब दिल में उतरती है इक लड़की
नित नए रंग, नित नई मुस्कान लिए
मन में उमंग भरती है इक लड़की
जीवन की सूनी बगिया महकती है जब
पारिजात बन झरती है इक लड़की
दिल ट्रिन-ट्रिन बजता है रोज़-रोज़ जब
सांझ ढले फोन करती है इक लड़की
✍️ चिराग़ जैन
Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry
जब से डाउनलोड की है
तुम्हारे नाम की फाइल
बार-बार हैंग होता है
दिल का सिस्टम
…शायद फाइल में वायरस था
जिसने सबसे पहले
डी-एक्टिवेट किया
ब्रेन का एंटी-वायरस
और फिर
करप्ट कर दिया
ऑपरेटिंग सिस्टम
..स्लो कर दी
मेमोरी
…शायद
इंस्टॉल करनी पड़ेगी
नई विंडो
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
ये हवा कल भी बही थी
ज़िन्दगी कल भी यही थी
कुछ कमी कल भी नहीं थी
पर तुम्हारे आगमन ने बीहड़ों में जान भर दी
संग अधरों के लगाकर बाँसुरी में तान भर दी
बिन तुम्हारे भी अधूरापन नहीं था ज़िन्दगी में
पर ख़ुषी का भी कोई कारण नहीं था ज़िन्दगी में
ये महक, ये बदलियाँ, ये बारिषंे कल भी यहीं थीं
कैसे मैं कह दूँ कोई सावन नहीं था ज़िन्दगी में
तुमने ही इन बारिषों को इक नई झनकार देकर
बदलियों को रंग, दिल को संग, मुझको प्यार देकर
मस्त मौसम में अचानक इक नई पहचान भर दी
संग अधरों के लगाकर बाँसुरी में तान भर दी
शब्द-सा बेकार था, तुम अर्थ बन मुझमें समाईं
आँसुओं का गीत था, तुम दर्द बनकर छलछलाईं
तुम समन्दर के हृदय पर लहर बनकर डोलती हो
आम्र-तरु की डालियों पर कोयलों-सी गुनगुनाईं
आपके आने से पहले मुस्कुराना भी कठिन था
खेलना, हँसना, मनाना, रूठ जाना भी कठिन था
तुमने अपनाकर ये मेरी ज़िन्दगी आसान कर दी
संग अधरों के लगाकर बाँसुरी में तान भर दी
✍️ चिराग़ जैन