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ज़रूरत

मेरी बेबस मुहब्बत को सहारों की ज़रूरत है
दीवाने को महज तेरे इशारों की ज़रूरत है
मेरा दिल क़ैद करने को तेरी ज़ुल्फ़ें ही काफी हैं
न तीरों की ज़रूरत है न तारों की ज़रूरत है

✍️ चिराग़ जैन

किसी के बिन…

भीतर-भीतर मन गलता है बाहर नैन बरसते हैं
बीते पल आँखों के आगे हर पल हलचल करते हैं
टूटन, आह, चुभन, सिसकन में जीवन घुलता जाता है
लोग किसी के बिन जी लेना कितना सहज समझते हैं

✍️ चिराग़ जैन

मुश्क़िल है

मैं अपने दिल के अरमानों को बहला लूँ तो मुश्क़िल है
अगर ख़ुद को किसी सूरत मैं समझा लूँ तो मुश्क़िल है
इधर दिल की तमन्ना है, उधर उनकी हिदायत है
नज़र फेरूँ तो मुश्क़िल है, नज़र डालूँ तो मुश्क़िल है

✍️ चिराग़ जैन

अनर्गल

चाहता था भावनाओं में जकड़ लूँ आपको
आप आगे बढ़ चुके, कैसे पकड़ लूँ आपको
लेकिन निर्णय के पथ पर अनुरोध अनर्गल लगता है
जीवन की नदिया के मग में अवरोध अनर्गल लगता है

मेरे मन की पीड़ा, मन में ही घुट कर रह जाएगी
अरमानों की डोली राहों में लुट कर रह जाएगी
मैं यादों के ताजमहल में शासक बन कर रह लूंगा
स्मृतियाँ दिल में उफ़नीं तो आँसू बन कर बह लूंगा
तुम बिन मुझको जीवन का हर मोद अनर्गल लगता है

तुम भी कभी-कभी यादों की गलियों में खो जाओगे
मन के आंगन में यादों की फुलवारी बो जाओगे
मेरा मन भी बीते कल में लौट-लौट कर आएगा
और आँचल उड़-उड़ कर तुमको मेरी याद दिलाएगा
प्रेममग्न उन्मुक्त हृदय को बोध अनर्गल लगता है

मैं भी हूँ लाचार, तुम्हारी भी अपने मज़बूरी है
क्योंकि इस भौतिक दुनिया में, पूंजी बहुत ज़रूरी है
लेकिन इस दौलत के मद में नेह धनधनी मत खोना
सौम्य सुकोमल अंतस् और हँसने की आदत मत खोना
जीवन नीरस हो तो फिर हर शोध अनर्गल लगता है

✍️ चिराग़ जैन

सुन्दरी

कारे-कारे कजरारे नैन तोरे प्यारे-प्यारे
गीले-गीले लागत हैं नदिया के कूल से
सौंधी-सौंधी खुसबू महकती है केसन में
मानो अभी नहा के आई हो गोरी धूल से
मस्तानी की दीवानी मुस्कान देख लें तो
रोम-रोम खिले गुलदाऊदी के फूल से
मीठी-मीठी बोली, मो से बोले तो मिठाई लागे
औरन से बोले तब चुभते हैं सूल से

✍️ चिराग़ जैन

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