छोड़ो वेद-पुरान
ईश्वर, बालक, माँ, कवि, ये सब एक समान
इन्हें प्रेम से जीत लो, छोड़ो वेद-पुरान
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
ईश्वर, बालक, माँ, कवि, ये सब एक समान
इन्हें प्रेम से जीत लो, छोड़ो वेद-पुरान
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
सूर्य जब-जब ले के अंगड़ाई उठा
पूजने सब चल पड़े थाली उठा
मुस्कुराकर आपने देखा मुझे
और कुछ ऐसा हुआ मैं जी उठा
क्या पता किस चांद के दीदार को
कब लहर की शक्ल में पानी उठा
सांझ ढलते ही हुआ सूरज निढाल
चांद पीकर रोशनी उसकी उठा
सोच अपनी सोच को कुछ इस तरह
लफ़्ज़ से हटकर नए मानी उठा
या तो तू सबकी तरह से बात कर
या फिर अपनी बात से आंधी उठा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
तलवे याद न रख सकें, मिट्टी का अहसास
इतना ऊँचा मत रखो सपनों का आकाश
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
पंक्ति अक्षर-शरों भरी तूणीर दिखाई देती है
दर्द भरे दिल में दुनिया की पीर दिखाई देती है
हास्य कहो या व्यंग्य कहो, शृंगार कहो या शौर्य कहो
हर कविता में मानव की तस्वीर दिखाई देती है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
है तमन्ना यही प्यार जीता रहे
सबका जीवन गुनाहों से रीता रहे
भावना सब के दिल में यही जन्म ले
दुख मैं पीता रहूँ सुख तू पीता रहे
✍️ चिराग़ जैन