सभ्यताओं के क्षरण में
क्षोभ के वातावरण में
वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा
व्यस्तताओं को हृदय का भान कमतर ही रहेगा
मुद्रिका में प्रेम का क्षण तो सहेजा जाएगा पर
भूल जाएगा मिलन के सौख्य को दुष्यंत इक दिन
प्रीति की उजड़ी हुई क्यारी पुनः पुष्पित न होगी
हर कथा है नियत इक छोर पर तो अंत इक दिन
विष पिलाया जाएगा भी
गीत गाया जाएगा भी
बावरी की प्रीति से विज्ञान कमतर ही रहेगा
वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा
जीतकर लंका अवध को लौट आए राम लेकिन
जानकी के त्याग की लौ से हृदय जलता रहेगा
न्याय की वेदी जिसे अपनत्व कहकर ठग चुकी है
वो अहम संबंध मन की टीस बन गलता रहेगा
याद हर बाकी रहेगी
रात एकाकी रहेगी
इस पराभव का जगत् को ज्ञान कमतर ही रहेगा
वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा
जो नहीं सीखा अभी संवेदना से पार पाना
अपशकुन है उस धनंजय का महारण में उतरना
हाथ में गाण्डीव लेकर भी नयन जो नम करेगा
है नियत उसका निज अन्तर आत्मा के हाथ मरना
शस्त्र सब तूणीर में हो
और अंतस पीर में हो
तो शरों का लक्ष्य हित संधान कमतर ही रहेगा
वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा
साधना को भंग करने मेनकाएँ आएंगी ही
इंद्र लेंगे सत्यवादी की बहुत दुष्कर परीक्षा
हर सृजन की राह में शीशा बिछाया जाएगा फिर
युग करेगा सत्व की उपलब्धियों की भी समीक्षा
कष्ट के बादल फटेंगे
राह में पर्वत डटेंगे
आत्मबल के शौर्य से व्यवधान कमतर ही रहेगा
वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा
✍️ चिराग़ जैन
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