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सियासत पनप रही है

नसीहतें अनसुनी रहेंगी, यही रवायत पनप रही है
पुरानी आफ़त तो टल गई पर नई मुसीबत पनप रही है

कहीं तिज़ारत, कहीं ज़रूरत, कहीं पे वहशत पनप रही है
अमां हटाओ भी दौरे-नौ में कहाँ शराफ़त पनप रही है

इधर मेरे घर में एक नन्हीं, हसीं नज़ाक़त पनप रही है
उधर मेरे मन में सुर्ख़ियों की तमाम दहशत पनप रही है

किसी की मजबूरियों के घुटने कभी टिकें तो ये याद रखना
जहाँ दबाया था हसरतों को वहीं बग़ावत पनप रही है

वो एक हिंदू, ये एक मुस्लिम, वो इसका दुश्मन, ये उसका दुश्मन
इसी तरह के फ़िज़ूल जुमलों पे अब सियासत पनप रही है

हरेक सच को बयान कर दें, पलट के रख दें हरेक बाज़ी
तुम्हारी मजबूरियों के दम पर, हमारी हिम्मत पनप रही है

जो एक आदत-सी हो गई है, तुम्हें हमारी ख़ुशामदों की
तुम्हारी आदत की आड़ लेकर, हमारी चाहत पनप रही है

बहुत दिनों तक संभाले रखी, तो ये मरासिम को लील लेगी
अभी मिटा दो दिमाग़ो-दिल से, अगर शिक़ायत पनप रही है

✍️ चिराग़ जैन

एफबी युग

फेसबुक की सूर्यरेखा अहर्निश गहराती जा रही है। लोगों के जीवन में फेसबुक ने इतना महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है कि कुछ लोगों ने तो हर श्वास और हर उच्छ्वास की सूचना देना शुरू कर दिया है।
बहुत जल्द ही ईश्वर भी मनुष्य के जीवन की अवधि मापने के लिए श्वास, वर्ष अथवा ऋतुओं जैसी पुरातन इकाइयों के स्थान पर फेसबुक लाइक्स की गणना करेगा। फिर ये चार दिन की ज़िंदगानी सौ लाइक्स की ज़िन्दगी बन जाएगी। धर्मगुरु प्रवचनों में कहेंगे कि ईश्वर ने इस फेसबुक स्टेटस अपडेट करने के लिए ये ज़िन्दगी दी है, ऑफ़लाइन रहकर इस अनमोल जीवन को नष्ट न करो। धर्मशास्त्रों में लिखा जाएगा कि जो प्राणी दूसरों के स्टेटस पर लाइकदान नहीं करेगा उसे अगले जन्म में फेसबुक पर लॉगिन करने की सुविधा नहीं मिलेगी। दान तब भी चार प्रकार का ही रहेगा- लाइकदान, कमेंट दान, स्माइली दान और शेयर दान।
गूगलदृष्टा ऋषि हमें बताएंगे कि जो प्राणी दूसरों की अपडेट को लगातार इग्नोर करता है, उसे टैगिंग जैसे महान कष्ट को भोगना पड़ेगा। इस ख्याति से आकृष्ट हो देवतागण भी फेसबुक आई डी बना लेंगे। उदाहरण के लिए सूर्यदेव की फेसबुक प्रोफाइल पर रोज सुबह अपडेट होगा – ‘राइज़िंग फ्राॅम द ईस्ट’। इस स्टेटस के साथ सूर्यदेव अख़बार के ‘सूर्योदय समय’ की फोटो डालेंगे। चिड़िया इस स्टेटस पर ‘चीं-चीं’ कमेंट करेंगी। फूल इसके नीचे स्माइली पोस्ट करके लिखेंगे ‘खिल रहे हैं।’ दोपहर में सूर्यदेव फिर स्टेटस डालेंगे – ‘फीलिंग हॉट’। उसके नीचे पसीने का कमेंट होगा- ‘बह रहा हूँ।’
कुत्तों को रात में चिल्लाना नहीं पड़ेगा, वे आधी रात को ‘क्राइंग’ की स्माइली पोस्ट करके आराम से सो जाएंगे। चैकीदार हर एक घंटे बाद लिख देंगे- ‘जागते रहो।’ चोर उस स्टेटस को पढ़कर सावधानी पूर्वक चोरी का स्टेटस डालेंगे।
सब कुछ कितना आसान हो जाएगा। हिन्दू मुस्लिम दंगे ट्विटर-फेसबुक दंगों में तब्दील हो जाएंगे। किसी बात पर चार ट्विटरिये चार फेसबुकियों की प्रोफाइल पर पोर्न पोस्ट कर देंगे। इसके जवाब में फेसबुकिये ट्विटरियों की प्रोफाइल पर वायरस छोड़ देंगे। भयंकर दंगा होगा। ख़ूनख़राबे की जगह ब्लॉक-बवेला होने लगेगा।
सूर्य रोज़ निकलेगा लेकिन फेसबुक पर। हवा बहेगी लेकिन फेसबुक पर। चांद उगेगा लेकिन फेसबुक पर। फूल खिलेंगे लेकिन फेसबुक पर। बच्चा पैदा भी फेसबुक पर होगा, वह अपनी पहली किलकारी गले से नहीं कीबोर्ड से लिखेगा। वो रोज़ स्कूल जाने का स्टेटस डालेगा। फेसबुक पर ही शादी, वहीं बच्चे, वहीं बुढ़ापा और वहीं मौत। फेसबुक पर ही शव यात्रा होगी और वहीं दाह संस्कार।
कोई यूजर ट्विटर की प्रोफाइल डिलीट करके फेसबुक पर साइन अप करेगा तो उसे पुनर्जन्म कहा जाएगा। प्राणी इस चक्र से छुटकारा पाने के लिए धर्म की शरण में जाएगा तो धर्म उसे बताएगा कि ‘ये सब सोशल साइट्स मिथ्या हैं, इनसे मोह न रखो। इनमें तुम्हारा समय और जीवन नष्ट हो जाएगा। हमारी एप्प डाउनलोड करो। वहां अनेक यूजर्स हैं जो इन सब चक्करों से मुक्त हो अपने नेटपैक को धर्म पर व्यय कर रहे हैं। जल्दी साइन अप करो प्राणी। तुम्हारा कल्याण होगा।’

✍️ चिराग़ जैन

उम्मीद के बिना

तुम हमेशा
मुझे दोषी ठहराती हो
कि मैं अपने रिश्तों में
उम्मीदें बहुत रखता हूँ

लेकिन समझ नहीं पाता हूँ मैं
कि उम्मीद के बिना
निभ ही कैसे सकता है
कोई रिश्ता

…..उम्मीद के बिना तो
दान तक नहीं दिया जाता!

✍️ चिराग़ जैन

झूठ के दम पे मुहब्बत

सच के कारण मिली नफ़रत क़ुबूल है लेकिन
झूठ के दम पे मुहब्बत नहीं अच्छी लगती

यूँ तो रिश्ते मेरे दिल को सुक़ून देते हैं
पर ये रिश्तों की सियासत नहीं अच्छी लगती

भूख जिस वक़्त कलेजा गलाने लगती है
तब ख़ुदाओं की इबादत नहीं अच्छी लगती

उनको कल तक मेरा क़िरदार बहुत भाता था
अब मेरी एक भी आदत नहीं अच्छी लगती

कैसे इस दौर के बच्चों को दुआ दे कोई
इनको पुरख़ों की नसीहत नहीं अच्छी लगती

काम जिस शख़्स का चलता हो बेइमानी से
उसको दुनिया में शराफ़त नहीं अच्छी लगती

क़ायदा जिसने मुहब्बत का पढ़ लिया हो चिराग़
उनको फिर कोई शरीयत नहीं अच्छी लगती

✍️ चिराग़ जैन

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