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सच के कारण मिली नफ़रत क़ुबूल है लेकिन
झूठ के दम पे मुहब्बत नहीं अच्छी लगती

यूँ तो रिश्ते मेरे दिल को सुक़ून देते हैं
पर ये रिश्तों की सियासत नहीं अच्छी लगती

भूख जिस वक़्त कलेजा गलाने लगती है
तब ख़ुदाओं की इबादत नहीं अच्छी लगती

उनको कल तक मेरा क़िरदार बहुत भाता था
अब मेरी एक भी आदत नहीं अच्छी लगती

कैसे इस दौर के बच्चों को दुआ दे कोई
इनको पुरख़ों की नसीहत नहीं अच्छी लगती

काम जिस शख़्स का चलता हो बेइमानी से
उसको दुनिया में शराफ़त नहीं अच्छी लगती

क़ायदा जिसने मुहब्बत का पढ़ लिया हो चिराग़
उनको फिर कोई शरीयत नहीं अच्छी लगती

✍️ चिराग़ जैन

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