+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

सियासत पनप रही है

नसीहतें अनसुनी रहेंगी, यही रवायत पनप रही है पुरानी आफ़त तो टल गई पर नई मुसीबत पनप रही है कहीं तिज़ारत, कहीं ज़रूरत, कहीं पे वहशत पनप रही है अमां हटाओ भी दौरे-नौ में कहाँ शराफ़त पनप रही है इधर मेरे घर में एक नन्हीं, हसीं नज़ाक़त पनप रही है उधर मेरे मन में सुर्ख़ियों की तमाम...

एफबी युग

फेसबुक की सूर्यरेखा अहर्निश गहराती जा रही है। लोगों के जीवन में फेसबुक ने इतना महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है कि कुछ लोगों ने तो हर श्वास और हर उच्छ्वास की सूचना देना शुरू कर दिया है। बहुत जल्द ही ईश्वर भी मनुष्य के जीवन की अवधि मापने के लिए श्वास, वर्ष अथवा ऋतुओं जैसी...

उम्मीद के बिना

तुम हमेशा मुझे दोषी ठहराती हो कि मैं अपने रिश्तों में उम्मीदें बहुत रखता हूँ लेकिन समझ नहीं पाता हूँ मैं कि उम्मीद के बिना निभ ही कैसे सकता है कोई रिश्ता …..उम्मीद के बिना तो दान तक नहीं दिया जाता! ✍️ चिराग़...

झूठ के दम पे मुहब्बत

सच के कारण मिली नफ़रत क़ुबूल है लेकिन झूठ के दम पे मुहब्बत नहीं अच्छी लगती यूँ तो रिश्ते मेरे दिल को सुक़ून देते हैं पर ये रिश्तों की सियासत नहीं अच्छी लगती भूख जिस वक़्त कलेजा गलाने लगती है तब ख़ुदाओं की इबादत नहीं अच्छी लगती उनको कल तक मेरा क़िरदार बहुत भाता था अब मेरी...
error: Content is protected !!