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याद

कभी जब नीम की डाली पे चिड़ियाँ चहचहाती हैं
हज़ारों ख्वाहिशें दिल में तड़पकर कुलबुलाती हैं
मेरे आगे से जब भी ख़ुशनुमा मंज़र गुज़रते हैं
किसी की याद में भरकर ये आँखें छलछलाती हैं

✍️ चिराग़ जैन

जीवन दर्शन

मुझे गुलमोहरों के संग झरना आ गया होता
किसी छोटे से तिनके पर उबरना आ गया होता
तो मरते वक़्त मेरी आंख में आँसू नहीं होते
कि जीना आ गया होता तो मरना आ गया होता

✍️ चिराग़ जैन

प्रेम-तीर्थ

मुम्बई में जुहू-चौपाटी पे शाम सात बजे
बाद; परिवार संग नहीं जाना चाहिए
आगरे में बालकों को ताज और प्रेमिका को
पालिवाल गार्डन में घुमाना चाहिए
बैंगलोर वाले लाल बाग़ जैसा कोई एक
प्रेमियों को देश भर में ठिकाना चाहिए
जहाँ पहले हैं, वहाँ और सुविधाएँ मिलें
जहाँ पे नहीं हैं वहाँ बन जाना चाहिए

आशिक़ों को आशिक़ी में डूबने के लिए
जोधपुर वाला एक लेक कायलाना चाहिए
सांझ वाला सत्संग करने के लिए
हर शहर में एक तीरथ बनाना चाहिए
ऐसे लोकप्रिय तीरथों के निर्माण हेतु
सरकार को भी अब आगे आना चाहिए
मानव प्रजाति वाले तोते-तोतियों के लिए
भी तो कोई बर्ड सेंचुरी बनाना चाहिए

✍️ चिराग़ जैन

चांद का किरदार

एक पल सूरज छिपा और फिर उजाला हो गया
लेकिन इसमें चांद का किरदार काला हो गया
साज़िशें सूरज निगलने की रची थीं चांद ने
पर वो अपनी साज़िशों का ख़ुद निवाला हो गया

✍️ चिराग़ जैन

वो शालीन पल

हाँ, गुज़ारे थे कभी दो-तीन पल
कुछ हसीं, कुछ शोख़, कुछ रंगीन पल

हर तरह की वासना से हीन पल
अब कहाँ मिलते हैं वो शालीन पल

भोग, लिप्सा, मोह के संगीन पल
कब किसे दे पाए हैं तस्कीन पल

आपका आना, ठहरना, लौटना
इक मुक़म्मल हादसा थे तीन पल

साथ हो तुम तो मुझे लगता है ज्यों
हो गए हैं सब मिरे आधीन पल

कँपकँपाते होंठ, ऑंखों में हया
किस तरह भूलेंगे ये रंगीन पल

दिल में रोशन रख उमीदों के ‘चिराग़’
छू न पाएंगे तुझे ग़मगीन पल

✍️ चिराग़ जैन

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