Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
हो गई है ज़िन्दगी अपनी सितारों की तरह
देखते हैं लोग भी अब तो नज़ारों की तरह
जो चले थे काम करने कामगारों की तरह
वो उनींदे से खड़े हैं अब कतारों की तरह
सब शिकारी की तरह घर से निकलते हैं मगर
सब फँसे मिलते शिकंजे में शिकारों की तरह
आपके हालात की बेइंतहा मज़बूरियाँ
और मेरे दहकते अरमां अंगारों की तरह
हर ग़ज़ल मानी बदल लेती है मौक़ा देखकर
शेर हैं सब बेवफ़ाओं के इशारों की तरह
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
लड़खड़ाकर गिरे नहीं होते
गर तेरे आसरे नहीं होते
कमनसीबी का दौर है वरना
हम भी इतने बुरे नहीं होते
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
दर्द की दास्तान सुन लेना
ख़ुद-ब-ख़ुद साहिबान सुन लेना
होंठ मेरे न कुछ कहेंगे मगर
आँसुओं का बयान सुन लेना
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
तुम छोड़ जाओगे- ये अहसास खल रहा है
सीने में दर्द का इक लावा पिघल रहा है
कुछ इस तरह से हर इक लम्हा निकल रहा है
हाथों से जैसे कोई रेशम फिसल रहा है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
जब से हम करने लगे बात-बात में जंग
तब से फीके पड़ गए त्यौहारों के रंग
धुआँ-धुआँ सा रह गया दीपों का त्यौहार
शोर-शराबा बन गया होली का हुड़दंग
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
पुल बनाओ तो सही इस फ़ासले के सामने
मुश्क़िलें ख़ुद हल बनेंगीं मसअले के सामने
आंधियाँ राहों में बिछ जाएंगीं सजदे के लिए
आसमां छोटा पड़ेगा हौसले के सामने
जब जवानी चल पड़ेगी बांधकर सर पर क़फ़न
कौन फिर आएगा उसके फ़ैसले के सामने
हिम्मतों ने ताक पर रखे ज़माने के उसूल
ताश के घर कब टिके हैं ज़लज़ले के सामने
रात भर लड़ता रहा था, जो अंधेरों से ‘चिराग़’
झुक गया सूरज भी ऐसे दिलजले के सामने
✍️ चिराग़ जैन