लड़कियाँ
मेरे पिता ने
बचपन में कभी
मुझे गुड़िया से नहीं खेलने दिया
ताकि मैं सीख सकूँ
कि लड़कियाँ
खेलने की चीज़ नहीं हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry
मेरे पिता ने
बचपन में कभी
मुझे गुड़िया से नहीं खेलने दिया
ताकि मैं सीख सकूँ
कि लड़कियाँ
खेलने की चीज़ नहीं हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
क़ामयाबी की आस्तीनों में
मेरी शोहरत से जल गए दुश्मन
दोस्तों में बदल गए दुश्मन
क़ामयाबी की आस्तीनों में
हाय धोखे से पल गए दुश्मन
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
इतनी सारी व्यस्तताओं के बीच
निकाल ही लेता हूँ
कुछ लम्हे
कविता लिखने के लिए।
बहुत सारी
अधलिखी कविताओं को छोड़
चुरा ही लाता हूँ कुछ पल
तुमसे बतियाने के लिए।
अक्सर पूछ बैठता हूँ ख़ुद से
क्या मिलता है मुझे
कविता लिखने से?
क्या हासिल होता है
तुमसे बतियाने से?
अच्छा लगता है
…यही ना!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
गहराई में जाकर बिल्कुल चुप हो जाती हैं
और किनारे आकर लहरें शोर मचाती हैं
लहरें पल भर में जीवन का सार बताती हैं
जिसमें से उठती हैं उस में ही मिल जाती हैं
जब उस अनुपम प्रथम मिलन की यादें आती हैं
नम होते हैं अधर और पलकें मुस्काती हैं
साहिल केवल कचरा ही देता है सागर को
फिर भी लहरें साहिल को मोती दे जाती हैं
मैं तो भावों और शब्दों में उलझा रहता हूँ
पर उनसे जुड़कर ग़ज़लें पावन हो जाती हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
ख़ुद अन्धेरे में रहकर ही
प्रकाशित करता है औरों को
…कैमरा।
लेकिन जैसे ही कोई किरण
रौशन करने आती है
कैमरे को…
…तो इसे
अंधियारी लगने लगती है
सारी दुनिया।
बिल्कुल इंसान की तरह है
कैमरा भी
…ओछा कहीं का!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Jainism, Poetry
महावीर स्वामी की पुरातन परंपरा के
वर्तमान युग में निशान देख लीजिए
संत के समागम का कैसा है प्रभाव आज
सज उठा कैसे बियाबान देख लीजिए
आभा का प्रभाव है या तप का चमत्कार
सबके दुखों का है निदान देख लीजिए
जहां-जहां चरण पड़े हैं दिव्य श्रमणों के
वहां-वहां तीरथ महान देख लीजिए
पुण्य का उदय है आपके हमारे जीवन में
ऐसे दिव्य पावन सुखद क्षण उतरे
धर्म की सभा में धार्मिकों का समागम है
जैसे महावीर का समोशरण उतरे
अहिंसा के बल पर शासन हो कैसे भला
धरती पे इसके उदाहरण उतरे
महावीर और महाप्रज्ञ की विरासत को
साथ लिए देखिए महाश्रमण उतरे
सादगी का नूर भी है, ज्ञान का कपूर भी है
अहिंसा का देते हैं पैग़ाम भी महाश्रमण
धर्मसंघ की कमान साधते हैं दिन-रैन
साधना में रहें आठों याम भी महाश्रमण
धर्म की पकड़ डोर, नापें धरती का छोर
घूमें गली-गली गाम-गाम भी महाश्रमण
कहाँ आखरों में बंध पाएंगे ऐसे महान
श्रमण; कि जिनका है नाम भी महाश्रमण
त्याग, तप, साधना से ऐसे हो गए प्रबल
कामना पे लगाते विराम भी महाश्रमण
भीतर से बाहर तलक दिव्यरूप संत
आत्मा भी, हाड़-मांस-चाम भी महाश्रमण
हर क्षण, हर पल, एक सा सलोना रूप
सुब्ह भी महाश्रमण, शाम भी महाश्रमण
जिसने समर्पण के झरोखों से निहारा
उसके लिए तो चारों धाम भी महाश्रमण
✍️ चिराग़ जैन