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जीवन का ज्ञान

पुरखों से आशीष, बुज़ुर्गों से जीवन का ज्ञान मिला
ऐसे मुझको जीवन भर मुस्काने का वरदान मिला
ईश्वर की अनुकम्पा है या फिर गत कर्मों का फल है
ख़ुशियां मेरी मीत हो गईं, दुख मुझसे अनजान मिला

✍️ चिराग़ जैन

काॅन्ट्रेक्ट बेस जाॅब

सरकारी नौकरी में
मिलने वाले
नियत वेतन की तरह
मिलता है
रिश्तों में दर्द।

और वार्षिक बोनस की तरह
मिल जाती है
ख़ुशी भी
यदा-कदा।

लेकिन
काॅन्ट्रेक्ट बेस जाॅब
होते हैं रिश्ते।

बहुत कुछ
सहन करना पड़ता है
इनमें!

…और
कब तक चलेंगे
कुछ कह नहीं सकते।

✍️ चिराग़ जैन

निस्पृह

तुम
हर बार तलाश लेती हो
कोई नई वजह
नकारने की।

…और मैं
हर बार
बिना वजह
स्वीकार लेता हूँ
मन ही मन।

हर बार बदल जाता है
तुम्हारा बहाना

…और मैं
हर बार
बिना वजह
कर बैठता हूँ
गुज़ारिश।

मैं हर बार रहता हूँ
वैसा का वैसा
क्योंकि मैंने
कभी तलाशी ही नहीं
कोई वजह
तुम्हें चाहने के लिए।

✍️ चिराग़ जैन

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