जीवन का ज्ञान
पुरखों से आशीष, बुज़ुर्गों से जीवन का ज्ञान मिला
ऐसे मुझको जीवन भर मुस्काने का वरदान मिला
ईश्वर की अनुकम्पा है या फिर गत कर्मों का फल है
ख़ुशियां मेरी मीत हो गईं, दुख मुझसे अनजान मिला
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
पुरखों से आशीष, बुज़ुर्गों से जीवन का ज्ञान मिला
ऐसे मुझको जीवन भर मुस्काने का वरदान मिला
ईश्वर की अनुकम्पा है या फिर गत कर्मों का फल है
ख़ुशियां मेरी मीत हो गईं, दुख मुझसे अनजान मिला
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
सरकारी नौकरी में
मिलने वाले
नियत वेतन की तरह
मिलता है
रिश्तों में दर्द।
और वार्षिक बोनस की तरह
मिल जाती है
ख़ुशी भी
यदा-कदा।
लेकिन
काॅन्ट्रेक्ट बेस जाॅब
होते हैं रिश्ते।
बहुत कुछ
सहन करना पड़ता है
इनमें!
…और
कब तक चलेंगे
कुछ कह नहीं सकते।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
उफ़
ये मुई
सपनों की रोशनी
पलकें बंद हैं
पर
चमक उठा है
चेहरा।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
कर्ता का सम्मान कहां है
ऐसा यहां विधान कहां है
राम-कृष्ण हैं, हर मंदिर में
तुलसी या रसखान कहां है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
तुम
हर बार तलाश लेती हो
कोई नई वजह
नकारने की।
…और मैं
हर बार
बिना वजह
स्वीकार लेता हूँ
मन ही मन।
हर बार बदल जाता है
तुम्हारा बहाना
…और मैं
हर बार
बिना वजह
कर बैठता हूँ
गुज़ारिश।
मैं हर बार रहता हूँ
वैसा का वैसा
क्योंकि मैंने
कभी तलाशी ही नहीं
कोई वजह
तुम्हें चाहने के लिए।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
भली कहाँ है भला ये तनाव की आदत
ज़रा-सी बात से आँखों में ताव की आदत
हरेक राह से मंज़िल तलक़ पहुँचता है
नहीं चुनाव पे निर्भर बहाव की आदत
माँ ने चीज़ें भी सहेजी सदा रिश्तों की तरह
हमने अपनाई नहीं रखरखाव की आदत
कभी ये देश धड़ी में हिसाब करता था
सभी को पड़ गई है आज पाव की आदत
ख़ामोश रह के सबको पार लगा देती है
एक दिन नाव डुबोएगी नाव की आदत
भरा, बड़ा, नरम, लदा, उदार और भारी
इन्हीं में तो सदा दीखी झुकाव की आदत
✍️ चिराग़ जैन