+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

तुम
हर बार तलाश लेती हो
कोई नई वजह
नकारने की।

…और मैं
हर बार
बिना वजह
स्वीकार लेता हूँ
मन ही मन।

हर बार बदल जाता है
तुम्हारा बहाना

…और मैं
हर बार
बिना वजह
कर बैठता हूँ
गुज़ारिश।

मैं हर बार रहता हूँ
वैसा का वैसा
क्योंकि मैंने
कभी तलाशी ही नहीं
कोई वजह
तुम्हें चाहने के लिए।

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!