Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
मिरी आँखों का मंज़र देख लेना
फिर इक पल को समन्दर देख लेना
सफ़र की मुश्क़िलें रोकेंगी लेकिन
पलटकर इक दफ़ा घर देख लेना
किसी को बेवफ़ा कहने से पहले
ज़रा मेरा मुक़द्दर देख लेना
बहुत तेज़ी से बदलेगा ज़माना
कभी दो पल ठहरकर देख लेना
हमेशा को ज़ुदा होने के पल में
घड़ी भर ऑंख भरकर देख लेना
मिरी बातों में राहें बोलती हैं
मिरी राहों पे चलकर देख लेना
न पूछो मुझसे कैसी है बुलन्दी
मैं जब लौटूँ मिरे पर देख लेना
मुझे बेताब कितना कर गया है
किसी का आह भरकर देख लेना
ज़माने की नज़र में भी हवस थी
तुम्हें भी तो मिरे परदे खले ना
मिरे दुश्मन के हाथों फैसला है
क़लम होगा मिरा सर देख लेना
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
दिल भी है इक ख़ूबसूरत से इदारे की तरह
लोग आते-जाते हैं, पानी के धारे की तरह
जब से ये संसार सारा हो गया है आसमां
तब से है इन्सानियत टूटे सितारे की तरह
चल सको तो तुम किसी के बन के उसके संग चलो
वरना इक दिन छूट जाओगे सहारे की तरह
दिल के रिश्तों को फ़रेबी उंगलियों से मत छुओ
जुड़ नहीं पाते, बिखर जाते हैं पारे की तरह
ज़िन्दगी तुम बिन भी यूँ तो ख़ूबसूरत झील थी
तुम मगर इस झील में उतरे शिकारे की तरह
आपका चेहरा भी मीठी ईद-सा ख़ुशरंग है
खिलखिलाहट चांद-तारे के नज़ारे की तरह
एक अरसा साथ रहकर भी पराए ही रहे
तुम समन्दर की तरह थे, हम किनारे की तरह
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
धूप में निखरोगे मेरी छाँव में जल जाओगे
इक पहेली हूँ, कहाँ तुम ढूंढने हल जाओगे
बर्फ़-सी ठंडक तो उसकी बात में होगी मगर
छू लिया जिस पल उसे उस पल ही तुम जल जाओगे
विषधरों के दंश का संकट भी झेलोगे ज़रूर
जब कभी लेने किसी जंगल से संदल जाओगे
धूप बनकर तुम दलानों में पसरते हो मगर
जब दरख्तों के तले आओगे तो ढल जाओगे
या तो तुम हमसे कोई रिश्ता रखोगे ही नहीं
या ज़माने की तरह तुम भी हमें छल जाओगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
सूर्य जब-जब ले के अंगड़ाई उठा
पूजने सब चल पड़े थाली उठा
मुस्कुराकर आपने देखा मुझे
और कुछ ऐसा हुआ मैं जी उठा
क्या पता किस चांद के दीदार को
कब लहर की शक्ल में पानी उठा
सांझ ढलते ही हुआ सूरज निढाल
चांद पीकर रोशनी उसकी उठा
सोच अपनी सोच को कुछ इस तरह
लफ़्ज़ से हटकर नए मानी उठा
या तो तू सबकी तरह से बात कर
या फिर अपनी बात से आंधी उठा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
ऐसा मत सोचो कि जब सब सोचेंगे तब सोचेंगे
पहले हम सोचेंगे तब ही तो इक दिन सब सोचेंगे
आख़िर बंदूकों से ही जब सारे काम निकलने हैं
आयत रटने से क्या हासिल अहले-मक़तब सोचेंगे
दो और दो को पाँच बनाने की तरक़ीबें क्या होंगीं
इस उलझन का हल कुर्सी पर बैठे साहब सोचेंगे
आज जिन्हें मीठी लगती हैं, मेरी कड़वी बातें भी
कल वो मीठी बातों के भी कड़वे मतलब सोचेंगे
कल की चिन्ताओं पर अपना आज निछावर क्या करना
कल की छोड़ो, कल का क्या है, आएगा तब सोचेंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
हम मुहब्बत का अंदाज़ा करेंगे
वो हिमाक़त का अंदाज़ा करेंगे
जब तलक दूरियाँ न हों शामिल
कैसे चाहत का अंदाज़ा करेंगे
आदमी को समझ न पाए जो
क्या वो क़ुदरत का अंदाज़ा करेंगे
दौरे-ग़म में कहे कोई कुछ भी
सब नसीहत का अंदाज़ा करेंगे
आदमी ज़िब्ह करने वाले ही
आदमीयत का अंदाज़ा करेंगे
ख़ुद ही आफ़त बुलाएंगे और फिर
ख़ुद ही राहत का अंदाज़ा करेंगे
जब भी बेबाक़ सच कहेंगे हम
वो बग़ावत का अंदाज़ा करेंगे
हम तो अपना समझ के कह देंगे
सब तिज़ारत का अंदाज़ा करेंगे
लोग मेरी हरेक हरक़त से
मिरी फितरत का अंदाज़ा करेंगे
✍️ चिराग़ जैन