Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
जब तक हमसे भाग्य हमारे खोटे होकर मिलते हैं
बस तब ही तक हम लोगों से छोटे होकर मिलते हैं
कोई कैसे सच बोले सबकी है अपनी लाचारी
अब तो दर्पण से भी लोग मुखोटे होकर मिलते हैं
जिनसे मतलब हो बस उनकी हाँ को हाँ कहते हैं जो
उनका क्या है; बिन पेंदी की लोटे होकर मिलते हैं
जब से ख़ुद्दारी गिरवी रख, हमने बेच दिया ईमान
तब से वही लिफ़ाफ़े हमको मोटे होकर मिलते हैं
हमरे कैसी करी तरक्क़ी, इमली, पीपल, बरगद सब
धरती से कट कर गमलों में छोटे होकर मिलते हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
ग़र वो मेरे हमसफ़र हो जाएंगे
चार दिन यूँ ही बसर हो जाएंगे
आज जो बनकर मरीज़ आए यहाँ
कल ये सारे चारागर हो जाएंगे
झूठ के सब दाँव सच के नाम पर
एक पल में बेअसर हो जाएंगे
चांद का मजहब नहीं पूछो जनाब
वरना दंगे चांद पर हो जाएंगे
हमने कब सोचा था सच्ची बात पर
आप रुसवा इस क़दर हो जाएंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
सच के मंतर से सियासत का ज़हर काट दिया
हाँ, ज़रा रास्ता मुश्क़िल था, मगर काट दिया
वक्ते-रुख़सत तिरी ऑंखों की तरफ़ देखा था
फिर तो बस तेरे तख़य्युल में सफ़र काट दिया
फिर से कल रात मिरी मुफ़लिसी के ख़ंज़र ने
मिरे बच्चों की तमन्नाओं का पर काट दिया
सिर्फ़ शोपीस से कमरे को सजाने के लिए
हाय ख़ुदगर्ज़ ने खरगोश का सर काट दिया
एक छोटा-सा दिठौना मिरे माथे पे लगा
बद्दुआओं का मिरी माँ ने असर काट दिया
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
चंद सस्ती ख्वाहिशों पर सब लुटाकर मर गईं
नेकियाँ ख़ुदगर्ज़ियों के पास आकर मर गईं
जिनके दम पर ज़िन्दगी जीते रहे हम उम्र भर
अंत में वो ख्वाहिशें भी डबडबाकर मर गईं
बदनसीबी, साज़िशें, दुश्वारियाँ, मातो-शिक़स्त
जीत की चाहत के आगे कसमसाकर मर गईं
मीरो-ग़ालिब रो रहे थे रात उनकी लाश पर
चंद ग़ज़लें चुटकुलों के बीच आकर मर गईं
वो लम्हा जब झूठ की महफ़िल में सच दाखिल हुआ
साज़िशें उस एक पल में हड़बड़ा कर मर गईं
क्या इसी पल के लिए करता था गुलशन इंतज़ार
जब बहार आई तो कलियाँ खिलखिला कर मर गईं
जिन दीयों में तेल कम था, उन दीयों की रोशनी
तेज़ चमकी और पल में डगमगा कर मर गईं
दिल कहे है- प्रेम में उतरी तो मीरा जी उठीं
अक्ल बोले- बावरी थीं, दिल लगाकर मर गईं
ये ज़माने की हक़ीक़त है, बदल सकती नहीं
बिल्लियाँ शेरों को सारे गुर सिखाकर मर गईं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
जो जितना भी सच्चा निकला
वो उतना ही तनहा निकला
सुख के छोटे-से क़तरे में
ग़म का पूरा दरिया निकला
कुछ के वरक़ ज़रा महंगे थे
माल सभी का हल्का निकला
मैंने तुझको ख़ुद-सा समझा
लेकिन तू भी सब-सा निकला
कौन यहाँ कह पाया सब कुछ
कम ही निकला जितना निकला
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
हमने देखे हैं कई साथ निभानेवाले
बरगला लेंगे तुझे भी ये ज़मानेवाले
बारिशों में ये नदी कैसा कहर ढाती है
ये बताएंगे तुझे इसके मुहानेवाले
धूप जिस पल मिरे आंगन में उतर आएगी
और जल जाएंगे दीवार उठानेवाले
मौत ने ईसा को शोहरत की बुलंदी बख्शी
ख़ाक़ में मिल गए सूली पे चढ़ानेवाले
रास्ते सच के बहुत तंग, बहुत मुश्क़िल हैं
सोच ले ये भी ज़रा जोश में आनेवाले
अपनी ऑंखों को भी सिखला ले हुनर धोखे का
झूठी बातों से हक़ीक़त को छिपानेवाले
✍️ चिराग़ जैन