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ग़र वो मेरे हमसफ़र हो जाएंगे
चार दिन यूँ ही बसर हो जाएंगे

आज जो बनकर मरीज़ आए यहाँ
कल ये सारे चारागर हो जाएंगे

झूठ के सब दाँव सच के नाम पर
एक पल में बेअसर हो जाएंगे

चांद का मजहब नहीं पूछो जनाब
वरना दंगे चांद पर हो जाएंगे

हमने कब सोचा था सच्ची बात पर
आप रुसवा इस क़दर हो जाएंगे

✍️ चिराग़ जैन

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