सफ़हे पलटते रहते हैं
ज़िन्दगानी है, या कोई किताब अनजानी
साँस चलती है या सफ़हे पलटते रहते हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
ज़िन्दगानी है, या कोई किताब अनजानी
साँस चलती है या सफ़हे पलटते रहते हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
ये शेरों की दहाड़ें झूठ हैं, कोरा दिखावा है
हमें अपनों से ख़तरा है, ये हर सैनिक का दावा है
बहुत लाचार हैं; पैरों में बेड़ी है सियासत की
वगरना हाथ में बंदूक है, सीने में लावा है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
अगर फ़ुर्सत मिले तो झाँक भर लेना किताबों में
हमारी याद ताज़ा है अभी सूखे गुलाबों में
हमें डर था, कहीं इज़हारे-दिल तुमको ख़फ़ा कर दे
तुम्हारी “हाँ” बिना सोचे चली आई जवाबों में
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
हम हैं हिंदी कविता की बुनियाद में गड़ने वाले लोग
कहीं बहुत जमने वाले और कहीं उखड़ने वाले लोग
कवि-सम्मेलन पर मजमेबाज़ी का तमगा मत टाँको
मंचों पर भी मिल जाते हैं, लिखने-पढ़ने वाले लोग
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
महफ़िलों की तेज़ नज़रों से छिटककर रो पड़ा
मन हुआ भारी तो इक पल को पलटकर रो पड़ा
राम जाने एक सूने घोंसले को देखकर
इक मुसाफिर क्यों अचानक से बिलखकर रो पड़ा
प्यार से, झुँझलाहटों से हर तरह रोका उन्हें
और फिर बेसाख़्ता लाचार होकर रो पड़ा
अपने सब अपनों को खुद से दूर जाता देखकर
लौटकर आया तो पर्दों से लिपटकर रो पड़ा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
कोई तो मंथरा रनिवास में है
अवध की हर ख़ुशी वनवास में है
अवध वालो हृदय को वज्र कर लो
कोई पत्थर छुअन की आस में है
कोई हठ पर अड़ा कोई नियम पर
मगर दशरथ गहन संत्रास में है
विवादों में तो कठिनाई बहुत है
क्या उससे भी अधिक उल्लास में है
दिलों में राम बसते हैं हमारे
मगर रावण हमारी श्वास में है
✍️ चिराग़ जैन