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अगर फ़ुर्सत मिले तो झाँक भर लेना किताबों में
हमारी याद ताज़ा है अभी सूखे गुलाबों में

हमें डर था, कहीं इज़हारे-दिल तुमको ख़फ़ा कर दे
तुम्हारी “हाँ” बिना सोचे चली आई जवाबों में

✍️ चिराग़ जैन

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