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बेअसर हो जाएंगे

ग़र वो मेरे हमसफ़र हो जाएंगे
चार दिन यूँ ही बसर हो जाएंगे

आज जो बनकर मरीज़ आए यहाँ
कल ये सारे चारागर हो जाएंगे

झूठ के सब दाँव सच के नाम पर
एक पल में बेअसर हो जाएंगे

चांद का मजहब नहीं पूछो जनाब
वरना दंगे चांद पर हो जाएंगे

हमने कब सोचा था सच्ची बात पर
आप रुसवा इस क़दर हो जाएंगे

✍️ चिराग़ जैन

एक प्यादे से मात पलटेगी

हर नई रुत के साथ पलटेगी
ख़ुश्बू-ए-क़ायनात पलटेगी

ये सियासत है इस सियासत में
एक प्यादे से मात पलटेगी

किसकी बातों का क्या यक़ीन करें
पीठ पलटेगी, बात पलटेगी

रंग परछाई तक का बदलेगा
सुब्ह होगी तो रात पलटेगी

तुम सँभलकर बस अपनी चाल चलो
इक न इक दिन बिसात पलटेगी

वक़्त जब-जब भी करवटें लेगा
ज़िन्दगी साथ-साथ पलटेगी

✍️ चिराग़ जैन

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