बहाना अनबन का
तू मेरे मन भा जाए या मैं तेरे मन भा जाऊँ
तू मुझसे जुड़ता जाए या मैं तुझसे जुड़ता जाऊँ
आओ तलाशें कोई बहाना अनबन का, इससे पहले
तू मुझसे उकता जाए या मैं तुझसे उकता जाऊँ
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
तू मेरे मन भा जाए या मैं तेरे मन भा जाऊँ
तू मुझसे जुड़ता जाए या मैं तुझसे जुड़ता जाऊँ
आओ तलाशें कोई बहाना अनबन का, इससे पहले
तू मुझसे उकता जाए या मैं तुझसे उकता जाऊँ
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
प्यार कब बेज़ुबान होता है
लफ्ज़ बिन दास्तान होता है
आँख तक बोलने लगें इसमें
इक मुक़म्मल बयान होता है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
अगर कुछ शोख़ियों की ओर उसका मन नहीं जाता
तो फिर इंसान के मन से कभी बचपन नहीं जाता
कोई कितना भी ख़ुद को सख्त दिल कहता रहे लेकिन
कभी यादों से पहले प्यार का सावन नहीं जाता
भले ही मिट गया दीवार का नामो-निशां भी अब
मगर मेरे ज़ेह्न से वो बँटा आंगन नहीं जाता
चुभन ही क्यों बहुत लम्बे समय तक याद रहती है
मिरे मन से वो इक पल का परायापन नहीं जाता
किसी के रूठ जाने पर जो पीछे छूट जाते हैं
बहुत दिन तक उन अपनों का अकेलापन नहीं जाता
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
कहाँ अचानक मिले हैं हम-तुम, यहाँ के मौसम में शायरी है
जवान रुत, मदभरी हवाएँ, ये शाम जैसे ठहर गई है
महकती रुत उनके सुर्ख़ नाज़ुक लबों को छूकर बहक रही है
सनम के भीगे बदन की लरजिश हमारे लहजे में आ गई है
जो सोच की हद में आ गया हो, वो चाहे जो भी हो आदमी है
किसी तरह भी समझने से जो, समझ न आए, ख़ुदा वही है
शराब पीकर बहकने वालों को उस नशे की ख़बर नहीं है
वो उम्र भर फिर सँभल न पाया, रसूल की जिसने मय चखी है
नज़र में शोख़ी, ज़ुबां में नरमी, बदन में मस्ती, लबों पे सुर्ख़ी
ये हुस्ने-जाना है या ख़ुदा ने, कोई सरापा ग़ज़ल कही है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
न जहाँ में तेरा जवाब है, न नज़र में तेरी मिसाल है
तेरी दोस्ती भी क़माल थी, तेरी दुश्मनी भी क़माल है
क्या हसीन खेल है ज़िन्दगी, कभी ग़मज़दा, कभी ख़ुशनुमा
कभी एक उम्र का ग़म नहीं, कभी एक पल का मलाल है
मेरी सोच बदली तो साथ ही, मेरी ज़िन्दगी भी बदल गई
कभी मुझको उसका ख़याल था, कभी उसको मेरा ख़याल है
ज़रा ये बता दे कहाँ गईं, तेरी दोस्ती, तिरी उल्फ़तें
मुझे अपने ग़म से गरज़ नहीं, तेरी रहमतों का सवाल है
तेरी राह मुझसे बदल गई, कि ये वक़्त थोड़ा बदल गया
तब दूर जाना मुहाल था, अब साथ रहना मुहाल है
✍️ चिराग़ जैन