Chirag Jain Writings, Prose, Story, Suno kahani
ईसर बाबा के एक अनुयायी सेठ ने बड़ी मेहनत और लगन से एक ख़ूबसूरत बगीचा लगवाया। सेठ की बड़ी इच्छा थी कि किसी दिन ईसर बाबा स्वयं उसका बगीचा देखने आएँ। एक दिन उसकी इच्छा पूरी हुई और बाबा उसके साथ बगीचे में पहुँच गए। सेठ बड़े चाव से बगीचे का कोना-कोना बाबा को दिखा रहा था। फलों से लदे वृक्ष और फूलों से लदी लताएँ दिखाते हुए सेठ का उत्साह सातवें आसमान पर था। जिसका सफल परिश्रम देखने उसके आराध्य आए हों, उसका उत्साह स्वाभाविक भी था। अचानक उत्साह के उद्वेग से बाहर आकर सेठ ने ध्यान दिया कि बाबा न तो वृक्षों का सौंदर्य देख रहे हैं, न ही फूलों के गुच्छों से ही आकृष्ट हो रहे हैं। बस चुपचाप उसकी बातों पर हुंकारा भरते हुए नीचे देखते हुए चले जा रहे हैं। बाबा के इस व्यवहार से सेठ किंचित निराश हुआ, किन्तु निरंतर बगीचे की विशेषताओं का वर्णन करता रहा। बाबा पहले की तरह नीची निगाह किये टहलते रहे। थोड़ी देर बाद सेठ का धैर्य डोल गया। वह झल्लाते हुए बोला – “बाबा! मैं आपको वृक्षों का सौंदर्य दिखाना चाह रहा हूँ और आपकी बगीचे में कोई रुचि ही नहीं है।” उसकी बेचैनी देख बाबा रुक गए। उन्होंने मुस्कुराती हुई आँखों से सेठ की ओर देखा और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोले- “जो सौंदर्य तुम मुझे दिखाना चाह रहे हो, वह इस बगीचे का वर्तमान मात्र है, मैं नीचे देखकर उन बिरवों को निहार रहा हूँ जिनमें इस बगीचे का भविष्य श्वास ले रहा है।” इतना कहकर बाबा नीचे झुके और मिट्टी के भीतर से फूट रहे एक नन्हें अंकुर को दुलारने लगे। सेठ ईसर बाबा के आशय को समझ गया और उस दिन के बाद उस बगीचे में उगने वाले हर नए बिरवे का अतिरिक्त ध्यान रखा जाने लगा।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished Geet
प्रेम चलकर आएगा जब तक प्रतीक्षा की गली में
तब तलक संसार भर में प्रीति जीवित रह सकेगी
है समर्पण जब तलक तैयार सब कुछ हारने को
उस घड़ी तक भावना की जीत जीवित रह सकेगी
जब तलक बदली स्वयं बेचैन होकर झर न जाए
तब तलक चातक उसे तकता रहेगा प्यास लेकर
बदलियों की शुष्क लापरवाहियों को क्या पता है
कण्ठ में अटके हुए हैं प्राण इक विश्वास लेकर
मृत्यु से पहले बरस जाओ, पिघल जाओ अगर तुम
तो प्रणयगत साधना की रीति जीवित रह सकेगी
उम्र काटी है शिला ने भी यही विश्वास रखकर
एक दिन मझमें विधाता प्राण भर देंगे परस कर
बेर चख-चख कर कोई शबरी प्रतीक्षारत रही है
इस अभागे प्रेम को स्वीकार लेंगे राम हँसकर
चेतना में प्रीत के अमरत्व का उल्लास भर दो
देह भी हर नियति के विपरीत जीवित रह सकेगी
✍️ चिराग़ जैन
Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry
मैंने
सीमेंट से सीखा है
कि जोड़ने के लिए
नर्म होना ज़रूरी है
और
जोड़े रखने के लिए
सख़्त…!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry, Unpublished Geet
ताल की आँखें सजल हैं
गन्ध की पाँखें विकल हैं
पेड़ पत्थर से हुए हैं
ख़्वाब नश्तर ने छुए हैं
पर अभी भी आस का दामन नहीं छूटा
आखि़री पत्ता नहीं टूटा
मुस्कुराहट पर बनावट का असर दिखने लगा है
हर क़दम पर अब कोई अनजान डर दिखने लगा है
नित नए अनुभव हमारी आस को खलने लगे हैं
रेत पर कुछ भ्रम हमारी प्यास को छलने लगे हैं
कष्ट बढ़ते जा रहे हैं
प्रश्न चढ़ते आ रहे हैं
आँख से आराम का सपना नहीं रूठा
आखि़री पत्ता नहीं टूटा
आँख के आगे कोई घेरा घनेरा छा गया है
है निपट एकांत, साये पर अंधेरा छा गया है
हर उजाला लुट चुका है, हर सहारा लुट चुका है
जो दिशा का ज्ञान देता वो सितारा लुट चुका है
आह का स्वर घुँट गया है
चाह का घर लुट गया है
हौसले का वक़्त ने झोला नहीं लूटा
आखि़री पत्ता नहीं टूटा
इस प्रतीक्षा के परे फिर से अहल्या श्वास लेगी
और शबरी के चखे हर बेर की क़िस्मत जगेगी
जानकी के पास सागर लांघ आएगी अंगूठी
भोर से पहले उठा ले आएंगे हनुमान बूटी
कष्ट जब हद से बढ़ेगा
देव को आना पड़ेगा
ये अटल विश्वास हो सकता नहीं झूठा
आखि़री पत्ता नहीं टूटा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished Geet
सुख मिलने से भी कतराया
दुःख देहरी तक चलकर आया
सुख के नखरे कौन उठाता
मैंने दुःख से यारी कर ली
सुख को पाने की कोशिश में, हर दिन ख़ुद को सेज किया है
दुःख, जिसने किरदार निखारा, उससे ही परहेज किया है
अब मैंने अपने दुखड़े संग
हँसने की तैयारी कर ली
सुख के नखरे कौन उठाता
मैंने दुःख से यारी कर ली
सुख की सबको चाह रही है, दुःख का कोई चाव नहीं है
पर सुख जो मुझसे करता है, वो अच्छा बर्ताव नहीं है
सुख से भीख नहीं मांगूंगा
दुःख से ही अलमारी भर ली
सुख के नखरे कौन उठाता
मैंने दुःख से यारी कर ली
जितनी इसकी पूछ करूं मैं, उतने ताव दिखाता है सुख
जिस दिन से मुँह फेर चला हूँ, पीछे-पीछे आता है सुख
तब इसने दुत्कार दिया था
अब मैंने ख़ुद्दारी भर ली
सुख के नखरे कौन उठाता
मैंने दुःख से यारी कर ली
साथ न छोड़ेगा जीवन भर, सारे दोष क्षमा कर देगा
दुःख से हँसकर मिल लूंगा मैं, तो ये क्या से क्या कर देगा
दुःख से रायशुमारी कर के
सारी दुनियादारी कर ली
सुख के नखरे कौन उठाता
मैंने दुःख से यारी कर ली
✍️ चिराग़ जैन