धर्म-युद्ध
पुरखों ने उदाहरण प्रस्तुत किया कि युद्ध के माहौल में भी धर्म की चर्चा की जा सकती है, हमने उदाहरण प्रस्तुत किया कि धर्म की चर्चा में भी युद्ध किये जा सकते हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
पुरखों ने उदाहरण प्रस्तुत किया कि युद्ध के माहौल में भी धर्म की चर्चा की जा सकती है, हमने उदाहरण प्रस्तुत किया कि धर्म की चर्चा में भी युद्ध किये जा सकते हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Geet, Poetry, Unpublished Geet
संकट हो कोई समक्ष खड़ा
या फिर घिर आए युद्ध बड़ा
जीवन की हर कठिनाई से
मानव का पुत्र सदैव लड़ा
मानवता का इक दिव्य भाव, अंतस् में धारण कर लेंगे
आपदा अगर कोई आई, मिल-जुल के निवारण कर लेंगे
सागर ने लांघी मर्यादा
सूनामी यम का रूप बनी
भूकम्पों की मनमानी से
जब धरा मृत्यु का कूप बनी
मानवता एक हुई सारी
विपदा उसके आगे हारी
सब मतभेदों का तिरस्कार, जीवन के कारण कर लेंगे
आपदा अगर कोई आई, मिल-जुल के निवारण कर लेंगे
जब जीवनदायी मेघ फटें
अम्बर से मौत बरसती हो
नदियाँ सुरसा का रूप धरें
धरती किसान को ग्रसती हो
पर्वत से गिरे शिला भारी
शहरों को डसे महामारी
मानवता की रक्षा हित हम, हर स्वार्थ समर्पण कर लेंगे
आपदा अगर कोई आई, मिल-जुल के निवारण कर लेंगे
जगती का कष्ट मिटाने को
शिव हालाहल पी जाते हैं
कान्हा गोकुल की रक्षा में
पर्वत का बोझ उठाते हैं
अस्थियाँ दान जहाँ ऋषि करें
और जनक खेत में कृषि करें
यदि समय त्याग का आया तो, हम याद कोई क्षण कर लेंगे
आपदा अगर कोई आई मिल-जुल के निवारण कर लेंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
जिस दरपन ने तुम्हें निहारा, उस दरपन का खालीपन
और सघन कर देता है इस अंतर्मन का खालीपन
कल तक आंगन में उनके आने की कोई आस तो थी
अब तो भुतहा सा लगता है इस आंगन का खालीपन
सारा कुछ खोकर भी जाने किसे जीतने निकला हूँ
शायद मुझमें घर कर बैठा है रावन का खालीपन
मेरा सब कुछ लेकर भी उनका मन रीता-रीता है
मेरे भीतर भरा हुआ है, उनके मन का खालीपन
शाम उदासी ओढ़ खड़ी है, बादल ग़ायब, हवा अचल
एक परिंदा भर सकता है नीलगगन का खालीपन
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Doha, Poetry
कान्हा के किरदार का, कोई ओर न छोर
इक पर वो जगदीश है, इक पल माखनचोर
गोपी, ग्वाले, बांसुरी, रास, नृत्य, बृजधाम
ये सारा कुछ कृष्ण का, केवल इक आयाम
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Muktak, Poetry, Purushottam
त्याग दी हर कामना निष्काम बनने के लिए
तीन पहरों तक तपा दिन, शाम बनने के लिए
घर, नगर, परिवार, ममता, प्रेम, अपनापन, दुलार
राम ने खोया बहुत श्रीराम बनने के लिए
✍️ चिराग़ जैन