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एक प्यादे से मात पलटेगी

हर नई रुत के साथ पलटेगी
ख़ुश्बू-ए-क़ायनात पलटेगी

ये सियासत है इस सियासत में
एक प्यादे से मात पलटेगी

किसकी बातों का क्या यक़ीन करें
पीठ पलटेगी, बात पलटेगी

रंग परछाई तक का बदलेगा
सुब्ह होगी तो रात पलटेगी

तुम सँभलकर बस अपनी चाल चलो
इक न इक दिन बिसात पलटेगी

वक़्त जब-जब भी करवटें लेगा
ज़िन्दगी साथ-साथ पलटेगी

✍️ चिराग़ जैन

वतन के नाम

अगर दुश्मन करे आग़ाज़, हम अंजाम लिख देंगे
लहू के रंग से इतिहास में संग्राम लिख देंगे
हमारी ज़िंदगी पर तो वतन का नाम लिखा है
अब अपनी मौत भी अपने वतन के नाम लिख देंगे

✍️ चिराग़ जैन

यादों के ताजमहल में

मैंने मुस्कानें भोगी हैं अब मैं ग़म भी सह लूँगा
स्मृतियाँ दिल में उफनीं तो आँसू बनकर बह लूँगा
तुम सपनों की बुनियादों पर रँगमहल चिनवा लेना
मैं यादों के ताजमहल में शासक बनकर रह लूँगा

✍️ चिराग़ जैन

दिल में आह बाक़ी है

जब तलक़ दिल में आह बाक़ी है
तब तलक़ वाह-वाह बाक़ी है

अब कहाँ कोई ज़ुल्म ढाता है
ये पुरानी कराह बाक़ी है

ख्वाब सारे फ़ना हुए लेकिन
देखिए ख्वाबगाह बाक़ी है

मैंने सब कुछ लुटा दिया लेकिन
अब भी इक ख़ैरख्वाह बाक़ी है

जिस्म को रूह छोड़ती ही नहीं
हो न हो कोई चाह बाक़ी है

ज़िन्दगानी भटक गई तो क्या
हर जगह एक राह बाक़ी है

कट चुका है शजर कभी का मगर
अब भी धरती पे छाह बाक़ी है

मिरे दिल को कचोटता है बहुत
मुझमें मेरा ग़ुनाह बाक़ी है

मिरी यादों के शामियाने में
एक भीगी निगाह बाक़ी है

✍️ चिराग़ जैन

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