Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
हर कोई ख़ुद को यहाँ कुछ ख़ास बतलाता मिला
हर किसी में ढूंढने पर आदमी यकसा मिला
आज के इस दौर में आदाब की क़ीमत कहाँ
वो क़लंदर हो गया जो सबको ठुकराता मिला
हर दफ़ा इक बेक़रारी उनसे मिलने की रही
हर दफ़ा ऐसा लगा, इस बार भी बेज़ा मिला
जिसने उम्मीदें रखीं और क़ोशिशें हरगिज़ न कीं
उसको अन्ज़ामे-सफ़र रुसवाई का तोहफ़ा मिला
रात जब सोया तो हमबिस्तर रहा उनका ख़याल
सुब्ह जब जागा तो होठों पर कोई बोसा मिला
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
हालात ने जब-जब भी माजरा बढ़ा दिया
जीने की हसरतों ने हौसला बढ़ा दिया
लफ्ज़ों के शोर में ये समन्दर ख़मोश थे
चुप्पी ने शाइरी का दायरा बढ़ा दिया
यूँ ख़त्म हो चुका था रात को ही मसअला
सुब्ह की सुर्ख़ियों ने मामला बढ़ा दिया
कुछ पहले ही लज़ीज़ थीं चूल्हे की रोटियाँ
फिर माँ की उंगलियों ने ज़ायक़ा बढ़ा दिया
मंज़िल थी मिरे रू-ब-रू, रस्ता था दो क़दम
अपनों की क़ोशिशों ने फासला बढ़ा दिया
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
चंद सस्ती ख्वाहिशों पर सब लुटाकर मर गईं
नेकियाँ ख़ुदगर्ज़ियों के पास आकर मर गईं
जिनके दम पर ज़िन्दगी जीते रहे हम उम्र भर
अंत में वो ख्वाहिशें भी डबडबाकर मर गईं
बदनसीबी, साज़िशें, दुश्वारियाँ, मातो-शिक़स्त
जीत की चाहत के आगे कसमसाकर मर गईं
मीरो-ग़ालिब रो रहे थे रात उनकी लाश पर
चंद ग़ज़लें चुटकुलों के बीच आकर मर गईं
वो लम्हा जब झूठ की महफ़िल में सच दाखिल हुआ
साज़िशें उस एक पल में हड़बड़ा कर मर गईं
क्या इसी पल के लिए करता था गुलशन इंतज़ार
जब बहार आई तो कलियाँ खिलखिला कर मर गईं
जिन दीयों में तेल कम था, उन दीयों की रोशनी
तेज़ चमकी और पल में डगमगा कर मर गईं
दिल कहे है- प्रेम में उतरी तो मीरा जी उठीं
अक्ल बोले- बावरी थीं, दिल लगाकर मर गईं
ये ज़माने की हक़ीक़त है, बदल सकती नहीं
बिल्लियाँ शेरों को सारे गुर सिखाकर मर गईं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
जो जितना भी सच्चा निकला
वो उतना ही तनहा निकला
सुख के छोटे-से क़तरे में
ग़म का पूरा दरिया निकला
कुछ के वरक़ ज़रा महंगे थे
माल सभी का हल्का निकला
मैंने तुझको ख़ुद-सा समझा
लेकिन तू भी सब-सा निकला
कौन यहाँ कह पाया सब कुछ
कम ही निकला जितना निकला
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
हमने देखे हैं कई साथ निभानेवाले
बरगला लेंगे तुझे भी ये ज़मानेवाले
बारिशों में ये नदी कैसा कहर ढाती है
ये बताएंगे तुझे इसके मुहानेवाले
धूप जिस पल मिरे आंगन में उतर आएगी
और जल जाएंगे दीवार उठानेवाले
मौत ने ईसा को शोहरत की बुलंदी बख्शी
ख़ाक़ में मिल गए सूली पे चढ़ानेवाले
रास्ते सच के बहुत तंग, बहुत मुश्क़िल हैं
सोच ले ये भी ज़रा जोश में आनेवाले
अपनी ऑंखों को भी सिखला ले हुनर धोखे का
झूठी बातों से हक़ीक़त को छिपानेवाले
✍️ चिराग़ जैन