Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
आकलन नहीं करना आप मेरी हस्ती का
कुछ अलग कलेवर है मेरे दिल की बस्ती का
एक ही ज़मीं पर मैं एक संग उगाता हूँ
एक गीत करुणा का, एक गीत मस्ती का
अश्क़ की कहानी भी शब्द में पिरोता हूँ
दर्द देखता हूँ तो ज़ार-ज़ार रोता हूँ
ख़ूब खिलखिलाता हूँ ग़लतियों पे मैं अपनी
व्यंग्य-बाण ख़ुद को मैं आप ही चुभोता हूँ
साज़िशें दिखें तो ये मन उदास होता है
लुत्फ़ भी उठाता हूँ साज़िशों की पस्ती का
एक गीत करुणा का, एक गीत मस्ती का
जिस क़लम से लिखता हूँ इक ग़्ाुलाब का खिलना
मैं उसी से कहता हूँ, तार-तार का छिलना
मंच पर चहकता हूँ, डायरी में रोता हूँ
आप जिस जगह चाहें मुझसे उस जगह मिलना
मानता हूँ लोहा भी चप्पुओं की हिम्मत का
गर्व भी है नौका की मौन सरपरस्ती का
एक गीत करुणा का, एक गीत मस्ती का
✍️ चिराग़ जैन
Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
झलक नहीं मिलती इनके पैरों के छालों की
काँटों पर कटती हैं रातें हँसने वालों की
सब जैसी ही देह, जरा का डर इनका भी है
आयु बढ़े तो तन निश्चित जर्जर इनका भी है
भूख-तृषा की व्याधि इन्हें भी घेरे रहती है
ख़ुद से हैं बेहोश, पीर ही इनको सहती है
स्वार्थ गलाकर कुंजी गढ़ लीं ग़म के तालों की
काँटों पर कटती हैं रातें हँसने वालों की
घर-परिवार-समाज-ललक-आशा-हसरत-सपने
रिश्ते-नाते-मित्र-विरोधी-अनजाने-अपने
जन्म-मरण-अपनत्व-परायापन-संयोग-वियोग
अगिन ठहाके इन शब्दों की भट्ठी में तपने
फ़िक्र नहीं है अपने जीवन के भूचालों की
काँटों पर कटती हैं रातें हँसने वालों की
दर्द मिला; करुणा लिख डाली इसमें क्या है ख़ास
बात तभी, जब पीर पचाकर उपजा जाए हास
आँसू के गीतों से अंतर्मन धुल जाता है
किंतु हँसी से महके भीतर दिव्य पवित्र सुवास
टीस नहीं सुनती दुनिया मदिरा के प्यालों की
काँटों पर कटती हैं रातें हँसने वालों की
✍️ चिराग़ जैन
Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
मौन लम्हों को पकड़कर शब्द में साकार करना
भावसागर से अमिय का घट जुटाने-सा कठिन है
कल्पना में कौंधते लाखों विचारों से उलझना
इक उफनती बाढ़ को काबू में लाने-सा कठिन है
राम का दुःख तब कहा जब रह गए तुलसी अकेले
मेघदूतम् के रचयिता ने विरह के कष्ट झेले
कृष्ण की इक बावरी ने विष पिया जीवन गँवाया
सूर के अंधियार में ही रौशनी के खेल खेले
अनुभवों की देह छूकर, शब्द में जीवन पिरोना
साँस से अहसास की क़ीमत चुकाने सा कठिन है
दूसरों को बाँट कर देखो कभी अपना उजाला
क्यों कबीरा ने लुकाठी से घरौंदा फूँक डाला
सीकरी की भेंट ठुकराना निरी दीवानगी है
प्राण से प्यारी सुता खोकर बना कोई निराला
आँसुओं को आँख में ही रोक कर स्याही बनाना
धमनियों में वर्णमाला को बहाने-सा कठिन है
सो गया शहरे-अवध में रोते-रोते मीर कोई
फै़ज़ होने के लिए पहने रहा ज़ंजीर कोई
गै़र मुमकिन है बिना अनुभव के वारिस शाह होना
उस बशर ने खोई होगी ज़िन्दगी में हीर कोई
ज़ख़्म की हर टीस को दिलचस्प-सा क़िस्सा बनाना
चोट खाकर महफ़िलों में खिलखिलाने-सा कठिन है
गीत लिखकर गीत ऋषियों ने असीमित दर्द ढाँपा
शायरों को इल्म है किस शाख़ पर कब फूल काँपा
जेल की दीवार पर अशआर हिम्मत से लिखे पर
पुत्र के सिर का कलेवा कर नहीं पाया बुढ़ापा
भाव, पारे की तरह छूने नहीं देता स्वयं को
काव्य रचना ओसकण से घर बनाने-सा कठिन है
भावनाओं के प्रसव का मिल गया वरदान कवि को
अश्रु पीकर बाँटनी होगी सदा मुस्कान कवि को
मुश्क़िलों की हर परत को खोल कर छूना पड़ेगा
ज़िन्दगी मिलती भला कैसे बहुत आसान कवि को
एक जीवन में सभी की भावना को शब्द देना
हर पहर मरते हुए जीवन बिताने-सा कठिन है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
कभी हिचकी, कभी आँसू, कभी मुस्कान बाँटेंगे
अना, उम्मीद, नेकी, हिम्मत-ओ-अरमान बाँटेंगे
कभी शब्दों का मरहम इश्क के घावों पे रखेंगे
कभी नफरत को चैनो-अम्न का सामान बाँटेंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
बिन मतलब के लड़ना छोड़
अड़ना और अकड़ना छोड़
या तो सोच बड़ी कर ले
या फिर लिखना-पढ़ना छोड़
✍️ चिराग़ जैन