इत्र
इत्र है हँसी
महक उठता है वो
जिस पर छिड़का जाए
लेकिन
जो छिड़कता है
वो तो
चमक ही उठता है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
इत्र है हँसी
महक उठता है वो
जिस पर छिड़का जाए
लेकिन
जो छिड़कता है
वो तो
चमक ही उठता है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
पुरखों से आशीष, बुज़ुर्गों से जीवन का ज्ञान मिला
ऐसे मुझको जीवन भर मुस्काने का वरदान मिला
ईश्वर की अनुकम्पा है या फिर गत कर्मों का फल है
ख़ुशियां मेरी मीत हो गईं, दुख मुझसे अनजान मिला
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
उफ़
ये मुई
सपनों की रोशनी
पलकें बंद हैं
पर
चमक उठा है
चेहरा।
✍️ चिराग़ जैन