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ख़ुशियाँ

आज डिनर टेबल पर गोल्डन एप्पल नहीं खाए माँ ने। बस कह भर दिया- “मुझे ना अच्छे लगते सेब-पेब।” और फिर हम सब चट कर गये सारे सेब हाथों-हाथ। …रात में तकिये पर सिर टिकाए छत पर चमकते रेडियम के सितारों में अचानक उभरकर याद आई माँ की बात- “सुन रे! सेब...

इत्र

इत्र है हँसी महक उठता है वो जिस पर छिड़का जाए लेकिन जो छिड़कता है वो तो चमक ही उठता है। ✍️ चिराग़...

जीवन का ज्ञान

पुरखों से आशीष, बुज़ुर्गों से जीवन का ज्ञान मिला ऐसे मुझको जीवन भर मुस्काने का वरदान मिला ईश्वर की अनुकम्पा है या फिर गत कर्मों का फल है ख़ुशियां मेरी मीत हो गईं, दुख मुझसे अनजान मिला ✍️ चिराग़...

मुख़्बिर

उफ़ ये मुई सपनों की रोशनी पलकें बंद हैं पर चमक उठा है चेहरा। ✍️ चिराग़ जैन
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