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संघ की जासूसी

ये नीतीशवा करे है कानाफूसी
करावे जासूसी
मोदी जी इनका साथ छोड़ दो
इनके तेवर में भर दो ज़रा भूसी
कि छोड़ो कंजूसी
सत्ता की शह-मात छोड़ दो

आर एस एस पर और विहिप पर नज़रें इनकी पैनी हैं
हम हैं मौन तुम्हारी ख़ातिर उनके हाथों छैनी हैं
हमें बता दो आख़िर कब तक गुंडागर्दी सहनी है
संघ लुटा तो बीजेपी की लाज कहाँ फिर रहनी है
जहाँ होती हो रोज़ बेईमानी
क्या दोस्ती निभानी
मोदी जी ये बिसात छोड़ दो
ये नीतीशवा करे है कानाफूसी
करावे जासूसी
मोदी जी इनका साथ छोड़ दो
इनके तेवर में भर दो ज़रा भूसी
कि छोड़ो कंजूसी
सत्ता की शह-मात छोड़ दो

✍️ चिराग़ जैन

छलायण

अहमपुरी के उपद्रव से व्यथित होकर दशरथ कोपभवन में बैठ गए। मन्थरा और आर्यसुमन्त ने बहुत समझाया किन्तु दशरथ न माने। कोई उपाय न सूझने पर कैकेयी ने उन्हें वचन दिया कि अहमपुरी के राजकुँवर को सिंहासन से उतार दिया जाएगा। दशरथ, कैकेयी तथा मंथरा पुष्पक विमान में बैठ अहमपुरी की ओर उड़ चले।
मानवता के पक्षधर तथा सत्ता के निर्लाेभी दशरथ की भावुकता को कैकेयी भली-भाँति समझती थी। आधे रास्ते में वह दशरथ के पास जाकर बोली- ‘स्वामी, मैंने जीवन भर तुम्हारी सेवा की है। कभी कुछ नहीं मांगा। आज एक वरदान मांगने की हिम्मत कर रही हूँ, राजकुँवर को सिंहासन से मत उतारो।’
कैकेयी की कुटिलता समझकर भी भावुक दशरथ ने मौन स्वीकृति दे दी। अहमपुरी का शासक बच गया। कैकेयी ने उसे अभयदान दे दिया। दशरथ आत्मग्लानि से भरकर दुर्बल हो गए। कुछ समय पश्चात उस राजकुँवर ने राजमहल में से दशरथ का पत्ता साफ़ कर दिया और कैकेयी तथा मन्थराओं को मार्गदर्शक बनाकर स्वयं शासक बन बैठा।
कैकेयी ने जब-जब उसे अपने उपकार याद दिलाने का प्रयास किया तब-तब उसने कैकेयी को उसी के अभयदान का सर्टिफिकेट दिखाकर चुप करा दिया। अब राजकुँवर जान-बूझकर कैकेयी, मंथरा, आर्यसुमन्त तथा ऋषि वशिष्ठ का सार्वजनिक अपमान करने लगा। एक दिन आर्यसुमंत राजकुँवर के व्यवहार से आहत होकर राजमहल छोड़ गए। कुछ समय पश्चात मंथरा भी परेशान होकर कथा से ओझल हो गई।
शत्रुघ्न ने इस निरंकुशता का विरोध किया किन्तु कैकेयी और ऋषि वशिष्ठ मौन रहे। एक दिन जब राजभवन में कक्षों का पुनर्वितरण हो रहा था तो अचानक पता चला कि कैकेयी और ऋषि वशिष्ठ को न केवल कक्ष सूची से वंचित किया गया अपितु राजभवन के बाहर चबूतरे पर भी बैठने की अनुमति नहीं दी गई।
आज कैकेयी उस दिन को कोस रही है जब उसने दशरथ से छल करके राजकुँवर को अभयदान दिलवाया था। बाबा तुलसी ने लिखा भी है- ‘कर्मप्रधान विश्व रचि राखा जो जस करहिं तसहु फल चाखा।’

✍️ चिराग़ जैन

हम तो भाप से भाँप लेते हैं

किसी एक घटना से पूरे व्यक्ति का, किसी एक व्यक्ति से पूरे समुदाय का, किसी एक समुदाय से पूर समाज का और किसी एक समाज से पूरे राष्ट्र का चरित्र आकलन करना हमारा अभ्यास है। इस अभ्यास में हम तर्कहीन हो जाते हैं। प्रत्येक बहस में हम अपनी बुद्धिमत्ता प्रदर्शित करने के उद्देश्य से कूदते हैं और जब बुद्धिमत्ता बहस से पहले समाप्त हो जाती है तो ऐसे तर्क करने लगते हैं जिनसे सबको पता चल जाए कि हम केवल बुद्धिमत्ता के भरोसे बहस में नहीं आए हैं, देर तक टिके रहने के लिए हमारे पास मूर्खता भी है।
एक सांसद ने अपनी पार्टी के ही एक विधायक का जूतों से अभिनन्दन कर दिया। विवाद का कारण वही था- ‘तेरी कमीज़ मेरी कमीज़ से ज़्यादा सफेद कैसे!’ इस सम्मान समारोह में बाकायदा मंत्रोच्चार के बीच अनुशासन की आहुति दी गई। इस घटना को सोशल मीडिया पर ट्रोल करते समय लोग पूरी पार्टी पर प्रश्नचिन्ह लगाने लगे। यह ग़लत बात है। किसी भी एक व्यक्ति के आचरण से पूरी पार्टी का आचरण तय नहीं किया जा सकता। कोई भी एक व्यक्ति पूरी विचारधारा का चरित्र नहीं हो सकता। ऐसा करना अपने आकलन के साथ बेईमानी करना है।
यह हम पूर्व में भी करते रहे हैं। एक मणिशंकर अय्यर के बयान से पूरी कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते रहे हैं। एक साध्वी के बयान से पूरी भाजपा पर प्रश्नचिन्ह लगाते रहे हैं। इस आचरण के कारण लोकतंत्र का जनमत भीड़ के उन्माद में परिवर्तित हो जाता है। यह हमने जातियों में भी किया है।
एक गांधी, महात्मा हो गए तो सारे गांधी ख़ुद को संत बताने पर उतारू हो गए। एक मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो सारे मोदी देश का पैसा लेकर घूमने निकल लिए। ऐसा करना ग़लत है। एक राहुल गांधी पूरी कांग्रेस का चरित्र नहीं हैं। एक नरेंद्र मोदी पूरी भाजपा का चरित्र नहीं हैं। एक लोहिया के वैचारिक कुनबे में सारे लोहिया जन्म नहीं लेते।
अम्बेडकर के बैनर तले इकट्ठा होकर लोग अम्बेडकर के बनाए कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हैं। लोहिया की विरासत को बपौती माननेवाले सत्ता की वसीयत को लेकर सिर फुटव्वल करते मिले। भगवा पहनने से कोई हिन्दू नहीं हो जाता और चरखा चलाने से कोई गांधी नहीं हो जाता। इस बाह्य ढोंग के सहारे ही सियासत की गाड़ी चलती है।
हम सब जानते हैं कि मुसलमानों के मंच पर टोपी पहनकर चढ़नेवाले लीडर, हिंदुओं के मंच पर पहुँचते ही रामनामी ओढ़ लेते हैं। हम सबको मालूम है कि राहुल गांधी केवल वोट पाने के लिए दलितों के घर खाना खाने गए। हम सबको पता है कि सफाई कर्मियों के पैर धोकर मोदी जी ने चुनावी चाल चली है। हम सबको सब पता है। हम सब कुछ जानकर भी इस अभिनय को चरित्र के झरोखे से निहारते रहते हैं।
राहुल गांधी बैंगकॉक जाते हैं, नरेंद्र मोदी मिसेज अम्बानी से हाथ मिलाते हैं, राहुल गांधी ने शादी नहीं की, नरेंद्र मोदी ने पत्नी को छोड़ दिया, राहुल गांधी को भाषण देना नहीं आता, नरेंद्र मोदी ने अमरीका के प्रेजिडेंट को झूला झुलाया, राहुल गांधी के कुर्ते की जेब फटी है, नरेंद्र मोदी का सूट बहुत महंगा है …इन मुद्दों पर हम वोट देते हैं। एक दरवाज़े से निकलता हुआ हर शख़्स एक जैसा हो, यह सम्भव नहीं है। एक बगीचे में उगनेवाले सारे फूल एक जैसे नहीं होते। कई बार चमेली भी केवल झाड़ बनकर रह जाती है और कई बार नागफनियों पर भी खूबसूरत फूल खिल जाते हैं।
एक ही व्यक्ति एक विषय पर सही और दूसरे विषय पर ग़लत हो सकता है। लेकिन हम इतने ज़िद्दी हैं कि या तो किसी को शत प्रतिशत सही मानेंगे या शत प्रतिशत ग़लत। हर शख़्स में, हर समुदाय में, हर पंथ में, हर दल में, हर विचारधारा में, हर आंगन में, हर देश में, हर घटना में कुछ सही और कुछ ग़लत ज़रूर होता है। इन दोनों को अलग-अलग न किया जाए तो अंधभक्ति और अंधविरोध जन्म लेता है, सुचारु व्यवस्थाएँ नहीं।

✍️ चिराग़ जैन

रामजी के काम का लिहाज

बिन बात आप जाने कैसे हो गए नाराज़
रामजी के काम का लिहाज भी नहीं रहा
वक़्त का स्वभाव बड़ा बेवफ़ा-सा है हुजूर
हमेशा किसी का परवाज़ भी नहीं रहा
रावण का दंभ धूल में मिला है बार बार
घर भी न रहा, राजकाज भी नहीं रहा
सच से नहीं है कोई नाता राजनीति का जी
कल भी नहीं था और आज भी नहीं रहा

✍️ चिराग़ जैन

Ref : Manoj Tiwari created a scene when someone ask him to sing a Ramayana Chaupai on stage.

ज़माना हुआ तंग भाइयो

त्रिपुरा में इक विप्लव अपनी सारी मर्यादा भूला
मोदी जी ने शी के संग फिर चाइना में झूला झूला
लालक़िले पर डालमिया के कब्ज़े का हल्ला-गुल्ला
राहुल को चैलेंज किया है पीएम ने खुल्लमखुल्ला
येदुरप्पा ने बुकिंग भी करा ली, शपथ रट डाली
कर्नाटक की है जंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

बिन मतलब के लंबे-लंबे भाषण पेल रहे हो तुम
छोटे बच्चों से भी बोगस दावे ठेल रहे हो तुम
समझ न आता आख़िर कैसे ख़ुद को झेल रहे हो तुम
कभी-कभी ऐसा लगता है घर-घर खेल रहे हो तुम
कभी बोलने की बाज़ियां लगा लीं, या शायरी सुना ली
उड़ती रही पतंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

देश फूँक कर अपनी कोठी जगमग ही तो करनी है
सिर्फ़ क्रीज़ पर टिके हुए कुछ ठक-ठक ही तो करनी है
तुम आपस में शर्त लगाकर टाइम पास करो अपना
क़ाग़ज़ देखो या मत देखो, बकबक ही तो करनी है
ये तो जनता है बड़ी भोली-भाली, बजाती रही ताली
बनी रही उमंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

जो चुप्पी साधे थे वो भी होंठ खोलना सीख गए
बीजेपी वाले दलितों का मोल तोलना सीख गए
ख़ुद मोदी जी ने माना है, अच्छे दिन तो आए हैं
कांग्रेसी मोदीशासन में झूठ बोलना सीख गए
कभी जातियों पे रोटियाँ पका लीं, कहीं पे बकी गाली
यूँ चढ़ता रहा रंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

सब अपनी-अपनी कहते हैं, कौन बताओ होश में है
सिर्फ़ जीत जाने की इच्छा हर इक के उद्घोष में है
उसकी वैसी हरक़त जितना पैसा जिसके कोष में है
बीजेपी तो मस्ती में है, कांग्रेस आक्रोश में है
कहीं मावस में भी है दीवाली, कहीं पे जेब ख़ाली
ये वोट की है जंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

इस गर्मी में काॅमेडी का हीटर किसने आॅन किया
ये कहते हैं पाण्डव दल ने कौरव दल को फोन किया
चंद दिनों में टाॅप इन्होंने बकवासों का ज़ोन किया
दिल्ली ले जाकर भाई को जैसे-तैसे मौन किया
कभी पान की दुकान खुलवा ली, या गाय पलवा ली
ये कैसा नया रंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

मनोरंजन पर भारी इस विप्लव के छक्के-चैके हैं
इस भाई ने दही-बड़े भी देसी घी में छौंके हैं
जब ज़ुबान चलती है तो फिर कौन जो उसको रोके है
नहीं डायना अच्छी लगती, ऐश्वर्या जी ओके हैं
जो दबी थी वो जी की कह डाली, यूँ आरज़ू निकाली
जवानी की उमंग भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क सब कुछ प्राइवेट हुए सर जी
हटी सब्सिडी गैस तेल के ऊँचे रेट हुए सर जी
लालक़िले के केअर टेकर मोटे सेठ हुए सर जी
हमें बताओ टैक्स के पैसे किनकी भेंट हुए सर जी
तुमने अपनी तो सेलरी बढ़ा ली, या रैलियाँ निकालीं
तमाशा करो बंद भाइयो
पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब ठाली
ज़माना हुआ तंग भाइयो

✍️ चिराग़ जैन

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