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गुनाह

सज़ाओं में मैं रियायत का तलबदार नहीं
क़ुसूरवार हूँ, कोई गुनाहगार नहीं
मैं जानता हूँ कि मेरा क़ुसूर कितना है
मुझे किसी के फ़ैसले का इन्तज़ार नहीं

✍️ चिराग़ जैन

मुझे तुम भूल सकते थे

फ़ज़ाई रक्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे
तुम्हारा अक्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे
तुम्हारी चाह हूँ, आदत, इबादत हूँ, मुहब्बत हूँ
महज इक शख़्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे

✍️ चिराग़ जैन

आसरा

लड़खड़ाकर गिरे नहीं होते
गर तेरे आसरे नहीं होते
कमनसीबी का दौर है वरना
हम भी इतने बुरे नहीं होते

✍️ चिराग़ जैन

मिरी आँखों का मंज़र देख लेना

मिरी आँखों का मंज़र देख लेना
फिर इक पल को समन्दर देख लेना

सफ़र की मुश्क़िलें रोकेंगी लेकिन
पलटकर इक दफ़ा घर देख लेना

किसी को बेवफ़ा कहने से पहले
ज़रा मेरा मुक़द्दर देख लेना

बहुत तेज़ी से बदलेगा ज़माना
कभी दो पल ठहरकर देख लेना

हमेशा को ज़ुदा होने के पल में
घड़ी भर ऑंख भरकर देख लेना

मिरी बातों में राहें बोलती हैं
मिरी राहों पे चलकर देख लेना

न पूछो मुझसे कैसी है बुलन्दी
मैं जब लौटूँ मिरे पर देख लेना

मुझे बेताब कितना कर गया है
किसी का आह भरकर देख लेना

ज़माने की नज़र में भी हवस थी
तुम्हें भी तो मिरे परदे खले ना

मिरे दुश्मन के हाथों फैसला है
क़लम होगा मिरा सर देख लेना

✍️ चिराग़ जैन

इक पहेली हूँ

धूप में निखरोगे मेरी छाँव में जल जाओगे
इक पहेली हूँ, कहाँ तुम ढूंढने हल जाओगे

बर्फ़-सी ठंडक तो उसकी बात में होगी मगर
छू लिया जिस पल उसे उस पल ही तुम जल जाओगे

विषधरों के दंश का संकट भी झेलोगे ज़रूर
जब कभी लेने किसी जंगल से संदल जाओगे

धूप बनकर तुम दलानों में पसरते हो मगर
जब दरख्तों के तले आओगे तो ढल जाओगे

या तो तुम हमसे कोई रिश्ता रखोगे ही नहीं
या ज़माने की तरह तुम भी हमें छल जाओगे

✍️ चिराग़ जैन

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