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अपनों से हारा लालकिला

जब लालकिला बदरंग हुआ
हथियार चले हुड़दंग हुआ
उस दिन पानी-पानी क्यों था सारा का सारा लालकिला
अपनों से हारा लालकिला

इस लालकिले ने कितने ही तख़्तों की उलट-पलट देखी
साज़िश देखीं, धोखे देखे, इतिहासों की करवट देखी
जब भी कोई दुश्मन आया, तब-तब हुंकारा लालकिला
अपनों से हारा लालकिला

प्राचीर बहुत शर्मिंदा थी, वीरों की कुर्बानी रोई
गणतंत्र हुआ था शर्मसार, छिपकर चूनर धानी रोई
धरती में गड़ता जाता था उस दिन दुखियारा लालकिला
अपनों से हारा लालकिला

उस दिन इसकी दीवारों पर बदनुमा दाग़ इक दंगा था
सबका अपना इक झंडा था, अपमानित खड़ा तिरंगा था
कैसे उजियारे में बदले इतना अंधियारा लालकिला
अपनों से हारा लालकिला

अब इसके दरवाज़े आकर, बातों का मेला रहने दो
कुछ देर सियासत बन्द करो, कुछ देर अकेला रहने दो
अब कुछ भी कैसे झेलेगा, भाषण या नारा लालकिला
अपनों से हारा लालकिला

शासन अधिकार लिए बैठा, जनता कर्त्तव्य बिसार गयी
उस दिन दोनों की मनमानी हर मर्यादा के पार गयी
शासित और शासक की जिद्द में पिसता बेचारा लालकिला
अपनों से हारा लालकिला

✍️ चिराग़ जैन

दिल्ली

रोज़ उजड़े, रोज़ सँवरे, इस शहर का दिल अलग है
मत मिसालें दो हमारी, अपना मुस्तकबिल अलग है
कुछ अलग है नूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

खण्डहरों के साथ कितने युग खड़े हैं मुँह उठाए
ख़ून में भीगी रही है साज़िशों के ज़ख़्म खाए
पर इन्हीं सब साज़िशों ने रच दिया इतिहास जग में
इसके दीवानों का किस्सा हो गया है ख़ास जग में
है यही दस्तूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

ये शहर बनकर रहा है पांडवों की राजधानी
इसने बाँची तोमरों की और पिथौरा की कहानी
लाट दिल्ली में गुलामो की गड़ी है शान बनकर
और रज़िया बैठ पाई तख़्त पर सुल्तान बनकर
मन हुआ मग़रूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

इस शहर ने खिलजियों के वहशती अरमान देखे
इस शहर ने तुगलकों के तुगलकी फरमान देखे
सैयदों का तौर देखा, लोदियों का ढंग देखा
शेरशाह सूरी सरीख़े शासकों का रंग देखा
कौन है मंसूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

शाहजहानाबाद बनकर ख़ूब इठलाती थी दिल्ली
चांदनी की रौनकों में रोज़ इतराती थी दिल्ली
लाल पत्थर के किले को चूमकर जमुना चली थी
सात दरवाज़ों के भीतर झूमकर दिल्ली पली थी
ताज था मखमूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

इस शहर ने ख़ूब देखा ताज मिट्टी में मिले थे
आज जो भी खण्डहर हैं, कल वहाँ रौशन क़िले थे
तख़्त रंगीला हुआ तो, छिन गयी सब शान इसकी
महल की अय्याशियों ने छीन ली पहचान इसकी
खोया कोहेनूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

मुल्क़ की ताक़त बनी जब एक बूढ़ी बादशाहत
तब नयी करवट बदलने लग गयी पूरी सियासत
इक शहंशाह को नहीं दो ग़ज़ ज़मीं तक दे सकी ये
फिर नये ही रूप में ढलने लगी हारी-थकी ये
हाल था मजबूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

और फिर रहने लगी बेचैन आठों याम दिल्ली
नौ दशक तक लड़ रही थी इक अलग संग्राम दिल्ली
उस समर में शांति भी थी, उस समर में जोश भी था
उस समर में इक तरफ़ दिल्ली चलो का घोष भी था
रास्ता था दूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

रायसीना को बड़ी मुश्किल से जब खादी मिली थी
सैंकड़ों बलिदान देकर हमको आज़ादी मिली थी
देश बँटने का स्वयं पर बदनुमा इल्ज़ाम सहकर
इस धरा पर ही गिरा था जब कोई ‘हे राम’ कहकर
पुँछ गया सिंदूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

इस शहर में दर्ज है बलिदान की अद्भुत कहानी
सीस कटवाए मगर अन्याय से कब हार मानी
तख़्त के ज़ुल्मो-सितम से जूझने की जिद्द बड़ी थी
तेग़ के आगे बहादुर की फ़क़त हिम्मत लड़ी थी
है अमर वो शूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

इस शहर को औलियाओं की ज़मीरी का गुमां है
सूफियों की मस्तमौला सी फ़क़ीरी का गुमां है
राम और रहमान बढ़कर साथ चलते हैं अभी भी
इस शहर में फूलवाले सैर करते हैं अभी भी
यूँ मिटा नासूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

आओ ना साहब यहाँ का चावड़ी बज़ार देखो
नाक सी सीधी गली में इत्र का व्यापार देखो
नफ़रतों को किस अदा से मिल रही है मात देखो
एक पंक्ति में खड़े हैं धर्म सब इक साथ देखो
इश्क़ कर मंजूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

चाट की लज़्ज़त उठाओ और परांठों का मज़ा लो
चावड़ी बाज़ार में हलवा-नगौरी ख़ूब खा लो
लुत्फ़ बालूशाही का लेना हो, यमुना पार कर लो
पान या कुल्फी खिलाकर जीभ का सत्कार कर लो
स्वाद है अमचूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

इस शहर को जान पाने का कोई ज़रिया नहीं है
नाम दरियागंज है, लेकिन वहाँ दरिया नहीं है
इस शहर में आदमीयत के अभी हिस्से मिलेंगे
तंग गलियों में बड़े दिल के कई किस्से मिलेंगे
प्यार है भरपूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

गुलमोहर के लाल फूलों के लिबासों का शहर है
टेसुओं का, नीम का और अमलतासों का शहर है
गुनगुनी-सी धूप में कचनार खिलता है यहाँ पर
हर गली में एक हरसिंगार मिलता है यहाँ पर
रंग कब बेनूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

जब ग़ज़ल छेड़ी तो छेड़ी ज़ौक़ का अंदाज़ लेकर
शायरी ग़ालिब ने की तो, इश्क़ को आवाज़ देकर
आज भी इक छाप ख़ुसरो की यहाँ आली मिलेगी
आज तक भी उर्स में मक़बूल क़व्वाली मिलेगी
मन रहा संतूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

चाह कर देखो नहीं है, कौन सा पकवान इसमें
इल्म उर्दू का बहुत है, और हिन्दी ज्ञान इसमें
जनवरी शिमला सरीखी,जून राजस्थान इसमें
ध्यान से देखो मिलेगा एक हिंदुस्तान इसमें
प्यार है दस्तूर दिल्ली का
दिल बहुत मशहूर दिल्ली का

✍️ चिराग़ जैन

संविधान

धागेनातीनकगधिंन ताल चलती है, पर
सुर सारेगामापाधानीसा में समाय के
नूपुर छनन छन, घनन घनन घण्ट;
मृदंग बजत द्रुम द्रुम द्रुम गाय के
पंचम-निषाद तीव्र-कोमल से रंगे राग,
दुगुन-तिगुन ताल भेद समझाय के
विलग विलग स्वर गान बनते हैं,
जब सब एकरूप होते सम पर आय के

कभी सब त्याग वीतराग निज भान करे,
कभी योग हर रोग का निदान हो गया
कभी बुद्ध, कभी युद्ध, कभी रुद्ध, कभी शुद्ध;
कभी युद्ध जीतने के बाद ज्ञान हो गया
कभी ज्ञानियों का राजधानियों ने मान किया,
कभी प्रेम ज्ञानवान से महान हो गया
विषम-विषम मान्यताओं के समक्ष भी है
सम जो विधान वही संविधान हो गया

✍️ चिराग़ जैन

हम तुम पार उतर जाएंगे

सुख होगा, उल्लास रहेगा
कभी-कभी कुछ त्रास रहेगा
जब सम्बन्ध निभेगा तो फिर
उसमें हर एहसास रहेगा
अच्छे-बुरे समय से हम-तुम, मिलकर साथ गुज़र जाएंगे
अपनेपन की नौका लेकर, इक दिन पार उतर जाएंगे

हम दोनों ने इस क़िस्से को मिलकर साथ सँवारा भी है
इक किरदार तुम्हारा भी है, इक किरदार हमारा भी है
अपना-अपना पात्र निभाकर, दोनों अपने घर जाएंगे

चाहे मुझसे रूठ भी जाना, कटु शब्दों के बान चलाना
लेकिन जब मैं तुम्हें मनाऊँ, तब तुम झटपट मान भी जाना
आँसू आए तो आँखों से फूल सरीख़े झर जाएंगे

उत्सव जैसा जीवन होगा, उत्सव का अवसान भी होगा
कभी-कभी सन्नाटा होगा, कभी-कभी तूफ़ान भी होगा
जो भी हो, हम साथ रहे तो सब व्यवधान बिखर जाएंगे

कुछ उम्मीदें भी टूटें तो, उसमें अपना साथ न टूटे
कैसी भी खींचातानी हो, इक-दूजे का हाथ न छूटे
बस इतना भर हो पाया तो, दिन ख़ुशियों से भर जाएंगे

✍️ चिराग़ जैन

कांग्रेस टू बीजेपी

इक नेता जो देसी था
बरसों से कांग्रेसी था
छंटा छँटाया दाना था
पंजे का दीवाना था
कन्टीन्यूअस विधायक था
छुटभैयों का नायक था
जब दस जनपथ जाता था
टिकटें लेकर आता था

हाथ बांध कर खड़े-खड़े
उसने कई चुनाव लड़े
लहर देश में नई चली
हाथ से कुर्सी गई चली
तबियत बहुत उदास हुई
राज्यसभा की प्यास हुई
सारे घोड़े खोल गया
मन की चाहत बोल गया
जा पहुंचा एआईसीसी
किन्तु वहाँ की एबीसी
उसे समझ पर भार मिली
लंबी एक कतार मिली
कई धुरंधर खड़े मिले
प्रभु चरणों में पड़े मिले
सूख गई सपनों की लेक
सीटें कम थी लोग अनेक
पार्टी में कुछ पद मिलता
तो उसका चेहरा खिलता
पर इसमें भी लोचा था
उसने सिर को नोचा था

कुछ दिन बाद उछाव हुआ
मध्यावधि चुनाव हुआ
पुनः टिकट का गिफ्ट मिला
मुरझाया सा फेस खिला
गया मुहर्रम ईद जगी
काडर से उम्मीद जगी
लेकिन किस्मत रूठ गयी
सब उम्मीदें टूट गयी
लोकल लीडर ठेल गए
गुपचुप गुपचुप खेल गए
परिणामों में कमल खिले
भितरघात के ज़ख्म मिले

इन ज़ख्मों को सिलने में
राहुल जी से मिलने में
साल महीने बीत गये
आस के सागर रीत गए
अब वो बिल्कुल ठाली था
हारा हुआ मवाली था
उसने हार नहीं मानी
पुनः जीतने की ठानी
छूछक, मुंडन, गौने में
पत्तल, कुल्हड़, दोने में
हर पंगत में खाता था
सबके दुःख में जाता था
जमकर जनसंपर्क किया
ग्रास रूट का वर्क किया

फिर चुनाव सिर पर आए
सारे लीडर हर्षाए
ठीक इलेक्शन से पहले
टीम सलेक्शन से पहले
ट्रैक्टर मांगा रेल मिली
अमित शाह की मेल मिली
जीवन का अद्भुत क्षण था
भजपा का आमंत्रण था

किन्तु वफ़ा को ढाल किया
राहुल जी को कॉल किया
थककर चूर हुआ भाई
लेकिन बात न हो पाई
आख़िर वो मजबूर हुआ
पंजे का लव दूर हुआ
हाथ के हाथों छला गया
बीजेपी में चला गया

✍️ चिराग़ जैन

ऐसी-तैसी हो गयी

तुमने कैसी फसल लगाई, सत्ता कैसी हो गयी
पूरे लोकतंत्र की भाई, ऐसी तैसी हो गयी

बीजेपी ने जीएसटी का खेल खिलाया ऐसा
बाज़ारों की लुटिया डूबी, बगलें झाँके पैसा
ये जीएसटी तुमसे पाई, ऐसी तैसी हो गयी

जिस ईवीएम के घपले को कोस रहे कांग्रेसी
अब उसके नुक़सान उठाओ, इसमें लज्जा कैसी
ईवीएम तुमने चलवाई ऐसी तैसी हो गयी

सरकारी सिस्टम का सत्ता ने मिसयूज़ किया है
अपने हित में तुमने भी तो टेम्पर लूज़ किया है
तोता बन गयी सीबीआई, ऐसी तैसी हो गयी

मनमोहन की इज़्ज़त का इन सबने किया कबाड़ा
तुमने तो उस बेचारे का ऑर्डिनेंस भी फाड़ा
तुम उनके अपने थे भाई, ऐसी तैसी हो गयी

आंदोलन पर पानी छिड़के सत्ता की मनमानी
रामदेव के आंदोलन में तुमने क्या थी ठानी
सोतों पर लाठी बरसाई, ऐसी तैसी हो गयी

निजीकरण के तुमने इन पर प्रश्न अनूठे दागे
ये वाले हैं तुमसे केवल चार कदम ही आगे
तुम लाए थे एफडीआई, ऐसी तैसी हो गयी
✍️ चिराग़ जैन

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