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अल्बम

छुपी है याद की कितनी बड़ी जागीर अल्बम में
रखे हैं फूल, आंसू और कितने तीर अल्बम में
तुम्हारी याद की अल्बम उठाई तो हुआ मालूम
बहुत बतिया रही है आज हर तस्वीर अल्बम में

✍️ चिराग़ जैन

साहित्य सृजन

दीवानेपन में दुनिया के सफहे मोड़ गए हैं यार
आशिक अपने नाख़ूनों से पर्वत तोड़ गए हैं यार
ख़ाक़ कहेगा कोई अब इस महफ़िल में कुछ बात नई
तुलसी, मीर, कबीर सभी कुछ लिख कर छोड़ गए हैं यार

✍️ चिराग़ जैन

छप्पन इंची

अपमानित होना पड़ता सैनिक के खून पसीने को
रोक नहीं पाए हैं अब तक उग्रवाद के कीने को
आईएसआईएस ने मरहूम किया बेटों के जीने को
शहद लगाकर चाटेंगे क्या छप्पन इंची सीने को

✍️ चिराग़ जैन

स्मॉग

चाह पूनम की थी तो अमा दे गए
रौशनी से रहित चन्द्रमा दे गए
फॉग बनकर जिन्होंने बुलाया निकट
स्मॉग बनकर वही अस्थमा दे गए

✍️ चिराग़ जैन

कविकर्म

कभी हिचकी, कभी आँसू, कभी मुस्कान बाँटेंगे
अना, उम्मीद, नेकी, हिम्मत-ओ-अरमान बाँटेंगे
कभी शब्दों का मरहम इश्क के घावों पे रखेंगे
कभी नफरत को चैनो-अम्न का सामान बाँटेंगे

✍️ चिराग़ जैन

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