+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

एक क़लम ऐसी

इस महफ़िल में चुपचुप बैठी एक क़लम ऐसी है जिसने
ग़ालिब से ग़ज़लें सीखी हैं, तुलसी से चैपाई ली है
अम्बर के उद्दीप्त सितारो, उसको किरणों से दुलराना
जिसने कविता के उपवन में अभी-अभी अंगड़ाई ली है
✍️ चिराग़ जैन

मन की निर्मलता छलकती है

सुबकियाँ गहरे उतर जाती हैं दिल के छोर तक
हिचकियाँ यादों में अटकाती हैं हमको भोर तक
फिक्र और चिंता को लेकर बाहर आता अट्टहास
मन की निर्मलता छलकती है नयन की कोर तक

✍️ चिराग़ जैन

हिम्मत

मुम्किन है कोई ख़ौफ़ मुझे थाम ले कहीं
ऐ हौसले तू दो घड़ी आराम ले कहीं
मैं मुश्किलों से टूट ही जाऊँगा शौक़ से
हिम्मत तो साथ छोड़ने का नाम ले कहीं

✍️ चिराग़ जैन

प्यादे बदल गए

कल तक हुजूर दिखते थे सादे, बदल गए
हालात बदलते ही इरादे बदल गए
शतरंज की बिसात पर जो तेज़ चले थे
देखो वज़ीर में वही प्यादे बदल गए

✍️ चिराग़ जैन

कोई खिलने पे आ जाए तो

महीना जून का है तिश्नगी हद से गुज़रती है
ज़मीं दो बून्द पानी के लिए भी आह भरती है
ख़ुदाया तल्ख़ हैं तेवर हवाओं के मग़र फिर भी
कोई खिलने पे आ जाए तो हर डाली सँवरती है

✍️ चिराग़ जैन

खुद मान जाना है मुझे

बस इसी सूरत हर इक रिश्ता निभाना है मुझे
जब कभी वे रूठ जाएं, तो मनाना है मुझे
वो मनाने आएंगे मुझको न ये उम्मीद हो
हर दफा खुद रूठकर खुद मान जाना है मुझे

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!