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संसद की कार्रवाई

हँस-हँस के कर रहे हैं, आपस में वो लड़ाई
हम जिनको सौंपते हैं ख़ुद अपनी रहनुमाई
लगता है हो रही है, भारत की जगहँसाई
टीवी पे चल रही है, संसद की कार्रवाई

✍️ चिराग़ जैन

परदेसी जीवन

1
ये है हासिल विदेश जाने का
ध्यान रखता हूं दाने-दाने का
कौन मुझको दुलारता आकर
फायदा क्या था कुलबुलाने का

2
जाने क्या बन के रह गया हूँ मैं
ध्यान रखता हूँ दाने-दाने का
घर कहीं, मैं कहीं, सुक़ून कहीं
ये है हासिल विदेश जाने का

✍️ चिराग़ जैन

चुटकुला

मंच की आलोचना का बोझ भी ढोता रहा
और उसका मंच पर उपयोग भी होता रहा
हास्य कविता की शक़ल में चुटकुला जब भी ढला
तालियाँ तो पिट गईं पर चुटकुला रोता रहा
✍️ चिराग़ जैन

आन्दोलन

हम तो हर इक ज़ुल्म की हद से गुज़र भी जाएंगे
शेर के बच्चे हैं, अपनी ज़िद पे मर भी जाएंगे
ताश के पत्तों से बनते हैं सियासत के मकां
ये तुम्हारे घर हवाओं से बिखर भी जाएंगे

कौन रोके, गर फना होने पतंगा आ गया
एक बादल सूर्य से लेने को पंगा आ गया
ये सियासतदां संभल जाएं कि अब इस मुल्क में
नौजवां पीढ़ी के हाथों में तिरंगा आ गया

हमें ज़हमत हुई और आप पर इल्ज़ाम आया है
चलो जो कुछ हुआ, जैसा हुआ, सब काम आया है
सफ़र में मुश्क़िलें थीं, दर्द था, डर था, कराहें थीं
मगर हर ज़ख़्म को भरता हुआ अंज़ाम आया है

✍️ चिराग़ जैन

घुटने

जिनकी पहचान थी ख़ुद्दारी, उन्हीं लोगों के
हाथ तो हाथ मेरे यार, जुड़े हैं घुटने
बात जब अपने पे आती है बदलते हैं उसूल
पेट की ओर ही हर बार मुड़े हैं घुटने
✍️ चिराग़ जैन

जीवन का ज्ञान

पुरखों से आशीष, बुज़ुर्गों से जीवन का ज्ञान मिला
ऐसे मुझको जीवन भर मुस्काने का वरदान मिला
ईश्वर की अनुकम्पा है या फिर गत कर्मों का फल है
ख़ुशियां मेरी मीत हो गईं, दुख मुझसे अनजान मिला

✍️ चिराग़ जैन

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