मैं लाचार हूँ
घटक दल बोलता है बस यही हर बार मैं लाचार हूं
मेरी तो बात सुनती ही नहीं सरकार मैं लाचार हूं
मेरी बीवी ने पाले हैं गली में यार, मैं लाचार हूं
मेरी बीवी चलाती है मेरा परिवार मैं लाचार हूं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
घटक दल बोलता है बस यही हर बार मैं लाचार हूं
मेरी तो बात सुनती ही नहीं सरकार मैं लाचार हूं
मेरी बीवी ने पाले हैं गली में यार, मैं लाचार हूं
मेरी बीवी चलाती है मेरा परिवार मैं लाचार हूं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
जश्न में खोने से पहले दो घड़ी ख़ुद को जगा लें
उत्सवों की देहरी पर देवताओं को मना लें
मुस्कुराहट दिव्य हो जाएगी गर दो पल ठहर कर
उल्लसित होने से पहले वंदना के गीत गा लें
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
निराशा तो मेरी आंखों को नम होने नहीं देगी
मगर उम्मीद मुझको चैन से सोने नहीं देगी
बहुत आसां नहीं होगा मेरे सपनों का सच होना
बहुत मुश्क़िल मेरी हिम्मत इसे होने नहीं देगी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
कोई इन्सान दिल के हाथ जब लाचार होता है
तो उसकी ज़िन्दगी का रास्ता दुश्वार होता है
मुहब्बत की कहानी में फ़क़त चेहरे बदलते हैं
वही किस्सा, वही इक वाक़या हर बार होता है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
बस यूं कहिए ध्यान नहीं था
वरना, मैं नादान नहीं था
उससे पहले ख़ुद को गिनना
ये इतना आसान नहीं था
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
ग़ायब से हो गए हैं, अख़बार से विपक्षी
चुन-चुन के आ गए हैं, बेकार से विपक्षी
बचने लगे हैं क्यूंकर तकरार से विपक्षी
शायद मिले हुए हैं, सरकार से विपक्षी
✍️ चिराग़ जैन