गीत विरह के
जाने क्या-क्या सह के लिक्खे
ये जो गीत विरह के लिक्खे
मेरा तो बस नाम लिखा है
तूने मुझमें रह के लिक्खे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
जाने क्या-क्या सह के लिक्खे
ये जो गीत विरह के लिक्खे
मेरा तो बस नाम लिखा है
तूने मुझमें रह के लिक्खे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
जो ख़ास हैं उन्हीं की अब दाल गल रही है
और आम आदमी की टोपी उछल रही है
सब चोर हैं सदन में- अख़बार बोलता है
फिर भी ग़ज़ब है उनकी, सरकार चल रही है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
अपनी बातों में कुछ नया भी नहीं
और कुछ ख़ास मुद्दआ भी नहीं
आपसे बात जब नहीं होती
ऐसा लगता है दिन गया भी नहीं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
या तो रिश्तों में सवालात को शुमार न कर
या जवाबों की हक़ीक़त पे ऐतबार न कर
पार ले जाएगा तुझको यकीन का धागा
तू किसी और सफ़ीने का इंतज़ार न कर
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
लोग अब दौलत तिजोरी में कमाकर रख रहे हैं
और कुछ हैं जो बाज़ारों में धमाके रख रहे हैं
रख रही है जब सियासत बंदिशें मुस्कान पर
तब यहाँ कुछ लोग जीवन में ठहाके रख रहे हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
ढाया है दरिंदों ने क्या कहर निवालों में
बच्चों को परोसा है, कल ज़हर निवालों में
क्या सोच के आया था, वो पहर निवालों में
किस क़द्र ठगा सा है, इक शहर निवालों में
✍️ चिराग़ जैन