नाम को गाली बनाएँगीं नस्लें
ये नफ़रतों का ज़हर मत उलीचिये साहिब
तुम्हारे नाम को गाली बनाएँगीं नस्लें
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
ये नफ़रतों का ज़हर मत उलीचिये साहिब
तुम्हारे नाम को गाली बनाएँगीं नस्लें
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
रौशनी पर तो किसी का भी इख़्तियार नहीं
जिस जगह रास्ता देखेगी, चली आएगी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
आदमी की ज़िन्दगी ईवेंट मेनेजमेंट है
मौत उसकी ज़िन्दगी का आख़िरी ईवेंट है
जिस्म इक होटल है जिसमें रूह इक टेनेंट है
साँस इस होटल में रहने के लिए बस रेंट है
साँस रहने तक जियोगे, ये तो एग्रीमेंट है
किस तरह जीना है अब ये आपका टैलेंट है
हर बशर इक चमचमाती कार जैसा है हुज़ूर
कुछ के इंजन में ख़राबी, कुछ के ऊपर डेंट है
जो मिले, जैसा मिले, जब भी मिले, स्वीकार कर
टेंपरेरी ज़िन्दगी में कौन परमानेंट है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
कल तक हुजूर दिखते थे सादे, बदल गए
हालात बदलते ही इरादे बदल गए
शतरंज की बिसात पर जो तेज़ चले थे
देखो वज़ीर में वही प्यादे बदल गए
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
महीना जून का है तिश्नगी हद से गुज़रती है
ज़मीं दो बून्द पानी के लिए भी आह भरती है
ख़ुदाया तल्ख़ हैं तेवर हवाओं के मग़र फिर भी
कोई खिलने पे आ जाए तो हर डाली सँवरती है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
कहने की सुविधा दिलवाई जाएगी
सच कहने पर रोक लगाई जाएगी
पागल हाथी की जंगली चिंघाड़ों से
बंसी की आवाज दबाई जाएगी
पहले मुद्दों से तो ध्यान हटाने दो
फिर शायद तस्वीर हटाई जाएगी
साहब मरहम लेकर आते ही होंगे
तब तक सबको चोट खिलाई जाएगी
जनता दंगों में फाके करती होगी
हाकिम के घर खीर बनाई जाएगी
✍️ चिराग़ जैन