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अंधेरा खुद पिघलकर आ गया

अकेला छोड़ दे जब ये मुकद्दर, कौन आता है
किसी के आँसुओं से आँख भरकर कौन आता है

अंधेरा खुद पिघलकर आ गया रौशन चिरागों में
हमारी बाँह में वरना सिमटकर कौन आता है

हमें तो उम्र भर बस तीरगी से जंग लड़नी है
चिरागों की खबर लेने पलटकर कौन आता है

कमसकम झूठ तो हरगिज नहीं किस्से फरिश्तों के
मुसीबत में हवा का रुख बदलकर कौन आता है

हम अपना दर्द लेकर राह पर नजरें बिछाए हैं
जरा देखें फरिश्ता या सितमगर, कौन आता है

✍️ चिराग़ जैन

वो भी तो तन्हा होगा

आपस का ये झगड़ा कुछ तो उसको भी खलता होगा
बस मैं ही तन्हा थोड़ी हूँ, वो भी तो तन्हा होगा

मैं तो हर मिलने वाले से मिलने से कतराता हूँ
वो भी सबसे मन की बातें करने से बचता होगा

शाम ढले मजबूरी में मैं बेमन से घर जाता हूँ
क्या वो भी घर के रस्ते पर रुक-रुक कर चलता होगा

अपने गम में रो लेने की फुरसत किस कमबख्त को है
मैं यूँ रोता हूँ वो मेरी यादों में रोता होगा

✍️ चिराग़ जैन

बर्ताव बदल जाता है

कौम को लूट के खाना नहीं सीखा हमने
इतनी शिद्दत से कमाना नहीं सीखा हमने

वक्त के साथ ही बर्ताव बदल जाता है
बस यही तौर-ए-जमाना नहीं सीखा हमने

कोई कश्ती ही पलट जाए तो मर्जी उसकी
बीच में छोड़ के जाना नहीं सीखा हमने

जिन चिरागों से हुआ एक भी लम्हा रौशन
उन चिरागों को बुझाना नहीं सीखा हमने

एक वो हैं कि गिनाए चले जाएँ अहसान
एक हम हैं कि जताना नहीं सीखा हमने

✍️ चिराग़ जैन

खुद मान जाना है मुझे

बस इसी सूरत हर इक रिश्ता निभाना है मुझे
जब कभी वे रूठ जाएं, तो मनाना है मुझे
वो मनाने आएंगे मुझको न ये उम्मीद हो
हर दफा खुद रूठकर खुद मान जाना है मुझे

✍️ चिराग़ जैन

अल्बम

छुपी है याद की कितनी बड़ी जागीर अल्बम में
रखे हैं फूल, आंसू और कितने तीर अल्बम में
तुम्हारी याद की अल्बम उठाई तो हुआ मालूम
बहुत बतिया रही है आज हर तस्वीर अल्बम में

✍️ चिराग़ जैन

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