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नए नग़मे सजा लेना

मैं जहाँ भी रहूँ मुझको ख़ुशी मिल जाएगी
बस मेरे गीत गुनगुना के मुस्कुरा देना
जब मेरे गीत इस जहान के काबिल न रहें
नए नग़मे सजा लेना मुझे भुला देना

✍️ चिराग़ जैन

तेरा बाप डार्लिंग

तू तिल है, ताड़ सा है तेरा बाप डार्लिंग
ससुरा कबाड़-सा है तेरा बाप डार्लिंग

हर वक्त चर्र-चर्र, चपड़-चैं, चुकर-चुकर
टूटे किवाड़ सा है तेरा बाप डार्लिंग

यूँ तू तो किसी कुश्ती के मैडल की तरह है
धोबी पछाड़ सा है तेरा बाप डार्लिंग

हर एक दाँत का है अलग रंग, अलग शेड
पूरा जुगाड़ सा है तेरा बाप डार्लिंग

रेखा जी की आवाज़ में बच्चन के डायलॉग
ऐसी दहाड़ सा है तेरा बाप डार्लिंग

✍️ चिराग़ जैन

हालात

अब तो अपने ही उसूलों से लड़ना पड़ता है
सच को बाज़ार में नीलाम करना पड़ता है
अब नहीं बहते हैं आँसू किसी जनाज़े पर
हालतन मर्सिया हर रोज़ पढ़ना पड़ता है

✍️ चिराग़ जैन

आस अभी बाक़ी है

हूक सीने के आस-पास अभी बाक़ी है
उनके आने की कोई आस अभी बाक़ी है
शामो-शब सहरो-सुबह देख चुका हूँ लेकिन
और कुछ देखने की प्यास अभी बाक़ी है

✍️ चिराग़ जैन

एक प्यादे से मात पलटेगी

हर नई रुत के साथ पलटेगी
ख़ुश्बू-ए-क़ायनात पलटेगी

ये सियासत है इस सियासत में
एक प्यादे से मात पलटेगी

किसकी बातों का क्या यक़ीन करें
पीठ पलटेगी, बात पलटेगी

रंग परछाई तक का बदलेगा
सुब्ह होगी तो रात पलटेगी

तुम सँभलकर बस अपनी चाल चलो
इक न इक दिन बिसात पलटेगी

वक़्त जब-जब भी करवटें लेगा
ज़िन्दगी साथ-साथ पलटेगी

✍️ चिराग़ जैन

वतन के नाम

अगर दुश्मन करे आग़ाज़, हम अंजाम लिख देंगे
लहू के रंग से इतिहास में संग्राम लिख देंगे
हमारी ज़िंदगी पर तो वतन का नाम लिखा है
अब अपनी मौत भी अपने वतन के नाम लिख देंगे

✍️ चिराग़ जैन

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