Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
विलीन नहीं हो पाता है
अविश्वास
कभी भी
किसी भी सम्बन्ध से।
केवल
ढँक लेती हैं उसे
प्रेम, अपनत्व, सौहार्द
और नेह की परतें
…किसी-किसी सम्बन्ध में
…कुछ समय के लिए।
शायद इसीलिए
प्रकट हो जाता है दोबारा
प्रेम का पर्दा गिरते ही!
दृश्य बदलते ही
नेपथ्य से निकल
चला आता है मंच पर
कभी घृणा
तो कभी शत्रुता का
रूप धर कर
….उफ़!
कितने सारे संवाद
याद रहते हैं इसे!!
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
हमारे मन में आशाएँ अलग हैं
मगर हाथों में रेखाएँ अलग हैं
हमारी अपनी सीमाएँ अलग हैं
तुम्हारी भी विवशताएँ अलग हैं
हमारी ख़ुद से तुलना मत करो तुम
हमारी प्राथमिकताएँ अलग हैं
करी है हमने सी.ए. की पढ़ाई
मगर अम्मा की गणनाएँ अलग हैं
असीमित स्वप्न बोए कल्पना ने
मगर अब वास्तविकताएँ अलग हैं
विषय-सूची में लिक्खा भाईचारा
मगर भीतर की शिक्षाएँ अलग हैं
जवानी का नशा ये याद रक्खे
बुढ़ापे की समस्याएँ अलग हैं
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
जहाँ तुमको बस एक पत्थर मिला है
वहाँ हमको जन्नत का मंज़र मिला है
उसे भी ग़ज़ब का मुक़द्दर मिला है
मुक़द्दर में जिसको तिरा दर मिला है
कहाँ कोई ऐसा क़लन्दर मिला है
जिसे मन मुताबिक़ मुक़द्दर मिला है
हुआ एक अरसे के बाद आज तनहा
लगा, जैसे कोई बिछड़कर मिला है
भले चोट की जिस्म पर दोस्तों ने
मगर ज़ख़्म उसका ज़ेह्न पर मिला है
कोई तेरी रहमत को माने न माने
तिरा नाम सबकी ज़ुबां पर मिला है
ज़माना भले उसको समझे न समझे
मगर इक इशारा बराबर मिला है
जिसे जो मिला है वो उसका मुक़द्दर
मुझे जो मिला है वो बेहतर मिला है
कोई उनसे पूछे मुक़द्दर के मानी
जिन्हें तिश्नगी में समन्दर मिला है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
जहां तुमको बस एक पत्थर मिला है
वहां हमको जन्नत का मंज़र मिला है
उसे भी ग़ज़ब का मुक़द्दर मिला है
मुक़द्दर में जिसको तेरा दर मिला है
हुआ एक मुद्दत के बाद आज तन्हा
लगा जैसे कोई बिछड़कर मिला है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
हर नई रुत के साथ पलटेगी
ख़ुश्बू-ए-क़ायनात पलटेगी
ये सियासत है इस सियासत में
एक प्यादे से मात पलटेगी
किसकी बातों का क्या यक़ीन करें
पीठ पलटेगी, बात पलटेगी
रंग परछाई तक का बदलेगा
सुब्ह होगी तो रात पलटेगी
तुम सँभलकर बस अपनी चाल चलो
इक न इक दिन बिसात पलटेगी
वक़्त जब-जब भी करवटें लेगा
ज़िन्दगी साथ-साथ पलटेगी
✍️ चिराग़ जैन