+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

अविश्वास

विलीन नहीं हो पाता है
अविश्वास
कभी भी
किसी भी सम्बन्ध से।

केवल
ढँक लेती हैं उसे
प्रेम, अपनत्व, सौहार्द
और नेह की परतें
…किसी-किसी सम्बन्ध में
…कुछ समय के लिए।

शायद इसीलिए
प्रकट हो जाता है दोबारा
प्रेम का पर्दा गिरते ही!
दृश्य बदलते ही
नेपथ्य से निकल
चला आता है मंच पर

कभी घृणा
तो कभी शत्रुता का
रूप धर कर

….उफ़!
कितने सारे संवाद
याद रहते हैं इसे!!
✍️ चिराग़ जैन

हमारी प्राथमिकताएँ अलग हैं

हमारे मन में आशाएँ अलग हैं
मगर हाथों में रेखाएँ अलग हैं

हमारी अपनी सीमाएँ अलग हैं
तुम्हारी भी विवशताएँ अलग हैं

हमारी ख़ुद से तुलना मत करो तुम
हमारी प्राथमिकताएँ अलग हैं

करी है हमने सी.ए. की पढ़ाई
मगर अम्मा की गणनाएँ अलग हैं

असीमित स्वप्न बोए कल्पना ने
मगर अब वास्तविकताएँ अलग हैं

विषय-सूची में लिक्खा भाईचारा
मगर भीतर की शिक्षाएँ अलग हैं

जवानी का नशा ये याद रक्खे
बुढ़ापे की समस्याएँ अलग हैं
✍️ चिराग़ जैन

कोई बिछड़कर मिला है

जहाँ तुमको बस एक पत्थर मिला है
वहाँ हमको जन्नत का मंज़र मिला है

उसे भी ग़ज़ब का मुक़द्दर मिला है
मुक़द्दर में जिसको तिरा दर मिला है

कहाँ कोई ऐसा क़लन्दर मिला है
जिसे मन मुताबिक़ मुक़द्दर मिला है

हुआ एक अरसे के बाद आज तनहा
लगा, जैसे कोई बिछड़कर मिला है

भले चोट की जिस्म पर दोस्तों ने
मगर ज़ख़्म उसका ज़ेह्न पर मिला है

कोई तेरी रहमत को माने न माने
तिरा नाम सबकी ज़ुबां पर मिला है

ज़माना भले उसको समझे न समझे
मगर इक इशारा बराबर मिला है

जिसे जो मिला है वो उसका मुक़द्दर
मुझे जो मिला है वो बेहतर मिला है

कोई उनसे पूछे मुक़द्दर के मानी
जिन्हें तिश्नगी में समन्दर मिला है

✍️ चिराग़ जैन

कोई बिछड़कर मिला है

जहां तुमको बस एक पत्थर मिला है
वहां हमको जन्नत का मंज़र मिला है

उसे भी ग़ज़ब का मुक़द्दर मिला है
मुक़द्दर में जिसको तेरा दर मिला है

हुआ एक मुद्दत के बाद आज तन्हा
लगा जैसे कोई बिछड़कर मिला है

✍️ चिराग़ जैन

एक प्यादे से मात पलटेगी

हर नई रुत के साथ पलटेगी
ख़ुश्बू-ए-क़ायनात पलटेगी

ये सियासत है इस सियासत में
एक प्यादे से मात पलटेगी

किसकी बातों का क्या यक़ीन करें
पीठ पलटेगी, बात पलटेगी

रंग परछाई तक का बदलेगा
सुब्ह होगी तो रात पलटेगी

तुम सँभलकर बस अपनी चाल चलो
इक न इक दिन बिसात पलटेगी

वक़्त जब-जब भी करवटें लेगा
ज़िन्दगी साथ-साथ पलटेगी

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!