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कोई बिछड़कर मिला है

जहां तुमको बस एक पत्थर मिला है
वहां हमको जन्नत का मंज़र मिला है

उसे भी ग़ज़ब का मुक़द्दर मिला है
मुक़द्दर में जिसको तेरा दर मिला है

हुआ एक मुद्दत के बाद आज तन्हा
लगा जैसे कोई बिछड़कर मिला है

✍️ चिराग़ जैन

प्रभु की वन्दना

नानक, कबीर, महावीर, पीर, गौतम को
पंथ-देश-जातियों का नाम मत दीजिए
जिनने समाज की तमाम बेड़ियाँ मिटाईं
उन्हें किसी बेड़ी का ग़ुलाम मत कीजिए
मन के फ़कीर अलमस्त महामानवों को
रूढ़ियों से जोड़ बदनाम मत कीजिए
प्राणियों के प्रति प्रेम ही प्रभु की वन्दना है
भले किसी ईश को प्रणाम मत कीजिए

✍️ चिराग़ जैन

प्रार्थना

सब चोरी का माल है, वाणी-भजन-पुराण
प्रेम-पत्र लिखवा रहे, ग़ैरों से नादान

रटी-रटाई प्रार्थना, सुना-सुनाया ज्ञान
बोर किया भगवान को, कैसे हो उत्थान

✍️ चिराग़ जैन

तुम महान हो

बीज ने वृक्ष से कहा-
“तुम महान हो”

वृक्ष ने उत्तर दिया-
“वृक्ष होने से पहले
मैं भी तुम जैसा ही था
जैसे तुम अब हो
मैं भी पहले ऐसा ही था”

…सुनकर
बीज धरती में गड़ गया
मिट्टी का एक आवरण उस पर चढ़ गया

फिर एक दिन
उसकी सीमाओं का खोल टूटा
उसमें से एक कोमल अंकुर फूटा
धूप-पानी पाकर
धीरे-धीरे वो अंकुर बड़ा हो गया
और एक दिन
मुस्कुराते हुए
वृक्ष के समकक्ष खड़ा हो गया

मनुष्य ने ईश्वर से कहा-
“तुम महान हो”
ईश्वर ने उत्तर दिया-
“ईश्वर होने से पहले
मैं भी तुम जैसा ही था
जैसे तुम अब हो
मैं भी पहले ऐसा ही था”

…सुनकर
मनुष्य इस सीधी-सादी बात के
गूढ़ अर्थ बूझने लगा
और जब कुछ नहीं सूझा
तो ईश्वर को पूजने लगा

✍️ चिराग़ जैन

जैन

राष्ट्र के निमित्त बलिदान कैसे करते हैं
भामाशाह वाली वो कहानी मत भूलना
आस्था के बल से जो कर्मों से जीत गई
महासती मैना जैसी रानी मत भूलना
सत्य के लिए जिन्होंने प्राण तक त्याग दिए
अकलंक जैसे महादानी मत भूलना
राजुल ने जहाँ धोई मेहंदी सुहागवाली
गिरनार का वो लाल पानी मत भूलना

जियो और जीने दो की बात करते हैं हम
कहीं और ऐसा उपदेश नहीं मिलता
मृत्यु के क्षणों को भी महोत्सव-सा मानते हैं
धरती पे ऐसा परिवेश नहीं मिलता
सारा सुख-वैभव जो जीत के भी त्याग आये
ऐसा कोई और गोमटेश नहीं मिलता
तप-त्याग से यहाँ परमपद मिलते हैं
हाथी-घोड़े वालों को प्रवेश नहीं मिलता

पंथ हैं अनेक जिनमत में भले ही पर
मोक्षमार्ग वाला सुविचार बस एक है
सैंकड़ों हों वाद औ विवाद किंतु सत्य है कि
अहिंसा पे सबका विचार बस एक है
मान्यताएं सबकी भले हीं हों विभिन्न किन्तु
पाँच पदवाला नवकार बस एक है
कैसे नरकों से निर्वाण पहुँचेगा जीव
पूरे जिन-आगम का सार बस एक है

जैन वो नहीं कि बस नाम में लिखा हो जैन
जैन वो है जिसके विचार जैन हो गए
जाति भले कोई भी हो, आप जैन ही रहेंगे
आत्मा के यदि संस्कार जैन हो गए
जीवदया और शाकाहार के हैं प्रतिबिंब
सत्य औ अहिंसा के आधार जैन हो गए
किन्तु मातृभूमि पे पड़ा है कभी संकट तो
ख़ुशी-ख़ुशी राष्ट्र पे निसार जैन हो गए
✍️ चिराग़ जैन

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