जब समय फंदा कसेगा भूमि में पहिया धँसेगा शाप सब पिछले डसेंगे पार्थ नैतिकता तजेंगे उस घड़ी तक जूझने का भ्रम निभाना है सब समय का बारदाना है नीतियों का ढोंग करतीं, सब सभाएँ मौन होंगी न्याय की बातें बनातीं मन्त्रणाएँ मौन होंगी जब प्रणय को भूलकर राघव निरे राजा बनेंगे तब सिया...
पतझर का आना निश्चित था पत्ते झर जाना निश्चित था हरियाली की आशाओं पर, बादल ने आघात करा है आँगन में जो ठूठ खड़ा है, वो सावन के हाथ मरा है दुःशासन ने चीर हरा तो ठीक समय आ पहुँचे माधव भीष्म काल बनकर बरसे तो तोड़ प्रतिज्ञा पहुँचे माधव एकाकी होकर जूझा अभिमन्यु अकेला...
जब तलक संघर्ष में थे, व्यस्तता के हर्ष में थे दृश्य कितने ही मनोरम, कल्पना के स्पर्श में थे स्वप्न जबसे सच हुआ, उकता रहे हैं हम जीतकर पछता रहे हैं हम जब हमें हासिल न थी, मंज़िल लुभाती थी निरन्तर बाँह फैलाए हमें हँसकर बुलाती थी निरन्तर पर पहुँच कर जान पाए, है निरी रसहीन...
पीड़ा की तैयारी कर लो, सुख का आमंत्रण आया है जब-जब कंचन मृग देखा है, तब-तब इक रावण आया है ईश्वर का अवतार जना है, माता को अभियोग मिलेगा कान्हा जैसा लाल मिला है, आगे पुत्रवियोग मिलेगा नारायण के बालसखा ने निर्धनता के कष्ट सहे हैं वंशी के रसिया जीवनभर, समरांगण में व्यस्त...