+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

शोभ रही नगरी सरयू-तट, खोज रहे उपमा तुलसी
नील सरोवर में दमके, जिस भाँति कली इक रातुल-सी
मानस-मानस राम बिराजत, आंगन-आंगन माँ तुलसी
या नगरी वरनैं न थके, क्या तो आदिकवि, अरु क्या तुलसी

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!