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दूसरा आयाम

जो प्रतीक्षा आँख में शबरी बसाए जी रही है वह प्रतीक्षा राम के भी पाँव में निश्चित मिलेगी धूप जैसी जिस विकलता को सुदामा ने जिया है वह विकलता द्वारिका की छाँव में निश्चित मिलेगी जो महल तक आ गयी होगी युगों का न्याय लेने वह किसी वन में सिसकती इक शिला की आह होगी जो युगों...

रावण

यदि अब राम की शरण में चला गया; तो मुझे मेरे भीतर का पाप मार डालेगा एकमात्र सधवा बचेगी मेरी पत्नी तो शेष विधवाओं का विलाप मार डालेगा जिनसे सुशोभित थी रावण की राजसभा उन रिक्त आसनों का शाप मार डालेगा मृत्यु जो करेगी वह जग को दिखायी देगा जीवन तो मुझे चुपचाप मार डालेगा जिस...

अयोध्या

शोभ रही नगरी सरयू-तट, खोज रहे उपमा तुलसी नील सरोवर में दमके, जिस भाँति कली इक रातुल-सी मानस-मानस राम बिराजत, आंगन-आंगन माँ तुलसी या नगरी वरनैं न थके, क्या तो आदिकवि, अरु क्या तुलसी ✍️ चिराग़...

हर सम्भव के साधन हैं

सपनों की आँखें पथराईं हिम्मत की पाँखें कुम्हलाईं संघर्षों की तेज पवन ने प्राणों की शाखें दहलाईं इन सारे झंझावातों से लोहा लिया ज़मीर ने अमृत सोख लिया रावण का राघव के इक तीर ने राजतिलक की शुभ वेला में राघव को वनवास मिला स्वर्ण जड़ित आभूषण उतरे, जंगल का संत्रास मिला...
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