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रामजी ने जिस मुहूर्त में कोई शुभकार्य किया, ग्रहों के उसी संयोग को हम शुभ मुहूर्त मानते थे। आज राजनीति ने हमें इस कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है कि रामजी के मंदिर के लिए शुभ मुहूर्त का टंटा पड़ रहा है।
अरे, उनका नाम लेकर तो जिस मुहूर्त में ईंट रख दो, वही शुभ है मूढ़ो! भूल गए क्या, उनके नाम से तो पत्थर तिर गए थे! पर उस समय राम जी के सब कारज इसलिए सिद्ध हो जाते थे, क्योंकि तब नल-नील की पूरी ऊर्जा पुल बनाने में केंद्रित थी, यदि वे भी राजनीति कर रहे होते तो चार सीटें फालतू मिलने पर रावण के हाथों बिक जाते और राम जी के आगे नाटक करते रहते कि ‘पुल वहीं बनाएंगे’!

✍️ चिराग़ जैन

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