भाग्यवाद
यहाँ प्रारब्ध का लेखा सिकन्दर तक ने भोगा है
पड़ोसी की ख़ताओं को समन्दर तक ने भोगा है
बहुत चाहा बचाना राम ने रावण को मरने से
मग़र जो लिख गया वो तो कलन्दर तक ने भोगा है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
यहाँ प्रारब्ध का लेखा सिकन्दर तक ने भोगा है
पड़ोसी की ख़ताओं को समन्दर तक ने भोगा है
बहुत चाहा बचाना राम ने रावण को मरने से
मग़र जो लिख गया वो तो कलन्दर तक ने भोगा है
✍️ चिराग़ जैन