Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी
कुछ मुंडेरों के मुक़द्दर में चमेली आ गयी
पैर भी सुस्ता लिये, आँखों ने भी दम ले लिया
ज़िंदगी की राह में, दिल की हवेली आ गई
झाँकता है हर कोई ऐसे दिल-ए-नाशाद में
जैसे आंगन में कोई दुल्हन नवेली आ गई
बोझ कंधों का उतर कर गिर गया जाने कहाँ
जब मेरे सिर पे बुज़ुर्गों की हथेली आ गई
तीरगी का ख़ौफ़, सन्नाटे की दहशत थी मगर
इक किरण सूरज की धरती पर अकेली आ गयी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Poetry, Unpublished
सच बोलने की भी जो हिम्मत जुटा न सके
ऐसी निरी खोखली जवानी किस काम की
शोषण को देख नहीं लहू में उबाल आए
बोलो ऐसी ख़ून की रवानी किस काम की
लाज, प्रेम, करुणा की नमी यदि सूख जाए
भला फिर आँख बिन पानी किस काम की
जिसके निधन पे न चार नैन नम हुए
ऐसे आदमी की ज़िन्दगानी किस काम की
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
हमने सूरज को यहाँ डूब के मरते देखा
और जुगनू से अंधेरों को सँवरते देखा
तूने जिस बात पे मुस्कान के पर्दे डाले
हमने उसको तेरी आँखों में उतरते देखा
एक लमहे में तेरे साथ कई रुत गुज़रीं
तेरे जाने पे मगर वक़्त ठहरते देखा
लोग कहते हैं बस इक शख़्स मरा है लेकिन
क्या किसी ने वहाँ सपनों को बिखरते देखा
तेरे विश्वास में कोई कमी रही है ‘चिराग़’
वरना पुरखों ने तो पत्थर को भी तरते देखा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
सूरज जैसा जल के देख
सोच में मेरी ढल के देख
मुझसे तेज़ निकल के देख
अपनी सोच बदल के देख
हाला तेरे अंतस् की
यहाँ-वहाँ न छलके देख
अगुआई क्या होती है
मेरे आगे चल के देख
फिर से तेरी बात चली
फिर से आँसू ढलके देख
राम लिखा और तैर गए
पत्थर होकर हल्के देख
पायल मौन चली आई
होंठ खुले साँकल के देख
याद, मुहब्बत, ख़्वाब, ख़याल
कितने रूप ख़लल के देख
शब्द बदलना छोड़ ‘चिराग़’
अब तू अर्थ बदल के देख
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
प्रेम, शांति और सौम्यता, सबका हो विस्तार
सबके जीवन में भरे, प्यार, प्यार और प्यार
✍️ चिराग़ जैन