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टोटका

बहुत उपजाऊ है
मेरे दिल की मिट्टी।
पनप जाता है
हर बीज
आसानी से।

बहुत आसानी से
फूट पड़ता है अंकुर,
बहुत आसानी से
द्विदल होता है बीज,
…लाल-लाल कोंपलें
……ताज़ा हरापन।

कभी ओस नहाई पत्तियाँ
तो कभी
गुपचुप बतियाती
डालियाँ।

कुछ पौधों पर
आ जाता है
बौर भी…
…लेकिन किसी डाल ने
कभी नहीं किया
फल का शृंगार…!

…शायद
कोई टोटका कर देता है
मेरी हरियाली पर!

✍️ चिराग़ जैन

क्या-क्या बदलता है

कभी मुद्दा, कभी चेहरा, कभी पाला बदलता है
सियासतदां सियासत के लिए क्या-क्या बदलता है

न पूछो वक़्त अपने साथ में क्या-क्या बदलता है
सुबह से शाम होने तक मेरा साया बदलता है

यहाँ हर आदमी उस गाम पर चेहरा बदलता है
जहाँ जाकर मेरे किरदार का ओहदा बदलता है

हुनर का वो भी इक मैयार होता है जहाँ जाकर
हुनर अपने तरीक़े से ही ये दुनिया बदलता है

सुलह हो भी तो आख़िर किस तरह मुमक़िन हो उससे, जो
सफ़ाई सुनने से पहले हर इक शिक़वा बदलता है

मिसालें दी नहीं जा सकतीं सफ़रे-क़ामयाबी की
कि इसका काफ़िला हर दौर में रस्ता बदलता है

कभी शाहों को भी लाचार देखा है बिसातों पर
कभी शतरंज की बाजी कोई प्यादा बदलता है

मरासिम जो बदल पाते नहीं गर्दिश की राहों पर
ग़ज़ब होता है जब उनको भी ये पैसा बदलता है

बहुत देखा शराफ़त के सफ़र पर राहगीरों को
कोई रस्ता बदलता है, कोई हुलिया बदलता है

✍️ चिराग़ जैन

फ़र्क

इतना-सा फ़र्क है
अंधियार और उजियारे में…

…कि अंधियारा
हाथों में उठाकर
किसी को
भेंट नहीं किया जा सकता!

…कि अंधियार को
हाथों में समेटने के लिए
मुट्ठी बंद करनी होती है

और उजियारा
अंजुरी बना देता है
हथेलियों को!

…कि अंधियारा
सीमित करता है
और उजियारा
सीमाओं पर छा जाता है
असीम होकर।

✍️ चिराग़ जैन

जीवन का ज्ञान

पुरखों से आशीष, बुज़ुर्गों से जीवन का ज्ञान मिला
ऐसे मुझको जीवन भर मुस्काने का वरदान मिला
ईश्वर की अनुकम्पा है या फिर गत कर्मों का फल है
ख़ुशियां मेरी मीत हो गईं, दुख मुझसे अनजान मिला

✍️ चिराग़ जैन

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